स्थान: रुड़की, जनपद हरिद्वार, उत्तराखंड
दिनांक: 3 नवंबर 2026
रुड़की। उत्तराखंड में प्रतिबंधित दवाओं की अवैध तस्करी के खिलाफ एसटीएफ और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की कार्रवाई लगातार जारी है। हरिद्वार में करीब 35 लाख रुपये कीमत के 18 हजार प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल बरामदगी मामले में एसटीएफ ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान फारूख पुत्र महबूब निवासी ग्राम भारापुर, थाना बहादराबाद, हरिद्वार के रूप में हुई है। इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या पांच हो गई है।
मई 2026 में पकड़ी गई थी प्रतिबंधित कैप्सूल की बड़ी खेप
इस पूरे मामले की शुरुआत मई 2026 में हुई थी। उस दौरान एसटीएफ/एएनटीएफ और मंगलौर कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 18 हजार प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए थे। बरामद कैप्सूल की कीमत करीब 35 लाख रुपये बताई गई थी।
इस मामले में मंगलौर कोतवाली में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22/29/60 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी विवेचना देहरादून एसटीएफ को सौंपी गई।
बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों से खुलती गई तस्करी नेटवर्क की कड़ियां
जांच के दौरान एसटीएफ ने आरोपियों के बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण किया। इसी जांच में पहले गिरफ्तार किए गए अंकित कुमार प्रजापति निवासी मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) की भूमिका सामने आई।
जांच में पता चला कि अंकित जनवरी 2026 से सह-आरोपी सचिन मनिहाल से ट्रामाडोल कैप्सूल लेकर हरिद्वार और आसपास के इलाकों में अवैध रूप से सप्लाई कर रहा था।
बताया गया कि प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री से मिलने वाली रकम में से आरोपी अपना कमीशन काटता था और बाकी धनराशि नकद या बैंक खातों के माध्यम से दूसरे आरोपियों तक पहुंचाता था। इस पूरे लेन-देन में सलमान और उसके सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई।
फारूख की भूमिका सामने आने के बाद एसटीएफ ने दबोचा
विवेचना आगे बढ़ने पर फारूख की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। एसटीएफ को मिले बैंकिंग और तकनीकी साक्ष्यों से पुष्टि हुई कि फारूख अपने अन्य साथियों के साथ प्रतिबंधित SPASMORE (ट्रामाडोल कैप्सूल) की अवैध सप्लाई में शामिल था।
जांच में यह भी सामने आया कि मई 2026 में बरामद की गई 18 हजार कैप्सूल की खेप से जुड़े नेटवर्क में फारूख की अहम भूमिका थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब आरोपी के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
संगठित गिरोह के रूप में काम करने के मिले साक्ष्य
एसटीएफ के मुताबिक, जांच में प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी संगठित गिरोह के रूप में किए जाने के तथ्य सामने आए हैं। इसी आधार पर दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 भी जोड़ी गई है।
एसटीएफ अब आरोपियों के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक्स, बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहनता से जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई कहां से होती थी और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
एसटीएफ एसएसपी ने दी कार्रवाई की जानकारी
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े आर्थिक और तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रतिबंधित दवाओं की अवैध सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच का उद्देश्य केवल सप्लाई करने वालों तक सीमित न रहकर पूरे तस्करी नेटवर्क और उसके आर्थिक लेन-देन का खुलासा करना है।
निष्कर्ष: हरिद्वार में 18 हजार प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल की बरामदगी से शुरू हुई जांच अब एक बड़े तस्करी नेटवर्क तक पहुंचती दिखाई दे रही है। फारूख की गिरफ्तारी के बाद मामले में अब तक पांच आरोपी पकड़े जा चुके हैं। एसटीएफ की जांच अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, दवाओं के स्रोत और पैसों के लेन-देन पर केंद्रित है।


