पिथौरागढ़, उत्तराखंड | 22 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खलिया टॉप में पर्यटन गतिविधियों के संचालन को लेकर नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यहां पर्यटकों को ठहराने के लिए निर्धारित संख्या से अधिक टेंट लगाए जाने पर वन विभाग ने कार्रवाई की है। विभागीय निरीक्षण के दौरान मौके पर 30 टेंट पाए गए, जबकि नियमानुसार केवल 12 टेंट लगाने की अनुमति थी। इस तरह स्वीकृत संख्या से 18 अधिक टेंट लगाए गए थे। वन विभाग ने संबंधित टूर ऑपरेटरों के चालान किए हैं और जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है।
अनुमति 12 टेंट की, मौके पर मिले 30
खलिया टॉप अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे बुग्यालों, हिमालय की मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं और ट्रैकिंग मार्गों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के साथ स्थानीय स्तर पर टेंट लगाकर ठहरने की व्यवस्था भी की जाती है।
हालांकि, इस क्षेत्र में टेंट लगाने के लिए निर्धारित सीमा का पालन करना अनिवार्य है। वन विभाग को नियमों के विपरीत अधिक टेंट लगाए जाने की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद विभाग की टीम ने मौके पर निरीक्षण किया। जांच के दौरान 12 टेंट की अनुमति के मुकाबले कुल 30 टेंट लगे पाए गए।
मुनस्यारी वन विभाग की एसडीओ नेहा सौन के अनुसार, खलिया बुग्याल में निर्धारित संख्या से 18 अधिक टेंट लगाए गए थे। संबंधित टूर ऑपरेटरों के चालान किए गए हैं और उन पर जुर्माना निर्धारित किया जाएगा।
बुग्यालों की संवेदनशीलता को लेकर चिंता
खलिया टॉप का बुग्याल क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों से प्राकृतिक वनस्पतियों, वन्यजीवों के आवास और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक कचरा, खुले में अपशिष्ट छोड़ना और बिना योजना के पर्यटन सुविधाओं का विस्तार ऐसे क्षेत्रों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इसलिए टेंट की संख्या नियंत्रित रखने, कचरे का उचित निस्तारण करने और पर्यावरणीय नियमों का पालन करने की जरूरत है।
पर्यटन भी जरूरी, प्रकृति की सुरक्षा भी
खलिया टॉप मुनस्यारी की पर्यटन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाले पर्यटकों से स्थानीय कारोबारियों, गाइडों और अन्य लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
वन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना और संवेदनशील बुग्याल क्षेत्र को अनियंत्रित पर्यटन के संभावित नुकसान से बचाना है।
चीन में बीमार पड़े उत्तराखंड के व्यापारी, लिपुलेख मार्ग खोलकर रेस्क्यू की तैयारी
धारचूला, पिथौरागढ़ | 22 अक्टूबर 2026
भारत-चीन सीमांत व्यापार के सिलसिले में चीन की तकलाकोट मंडी गए उत्तराखंड के एक व्यापारी की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र के गर्थ्यांग गांव निवासी प्रेम सिंह गुंज्याल को लकवा पड़ने के बाद चीनी चिकित्सकों ने उनके मस्तिष्क में खून का थक्का जमने की जानकारी दी है। डॉक्टरों ने उनकी सर्जरी की जरूरत बताई है।
व्यापारी की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों ने उन्हें जल्द से जल्द भारत लाकर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय प्रशासन भी सक्रिय हुआ और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के प्रयास शुरू किए गए।
तकलाकोट में बिगड़ी तबीयत, सर्जरी की जरूरत
जानकारी के अनुसार, प्रेम सिंह गुंज्याल सीमांत व्यापार के सिलसिले में चीन की तकलाकोट मंडी गए हुए थे। इसी दौरान दो दिन पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें लकवा पड़ गया।
इसके बाद उन्हें स्थानीय चिकित्सकों के पास ले जाया गया। जांच में उनके मस्तिष्क में खून का थक्का जमने की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई। चिकित्सकों ने सर्जरी की आवश्यकता बताई, जिसके बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई।
परिजनों का कहना है कि व्यापारी को जल्द से जल्द भारत लाकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनकी गंभीर हालत के कारण समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण हो गया।
लिपुलेख मार्ग पर बर्फ बनी चुनौती
व्यापारी को चीन से भारतीय क्षेत्र में लाकर अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया में लिपुलेख मार्ग पर भारी बर्फ जमा होना बड़ी बाधा बन गया था। सीमा क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित होने से व्यापारी को सुरक्षित वापस लाने में मुश्किलें आ रही थीं।
परिजनों ने प्रशासन से मार्ग खोलने और हेलीकॉप्टर के माध्यम से उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगाई। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने रास्ता साफ करने और रेस्क्यू की व्यवस्था बनाने के प्रयास शुरू किए।
ITBP, सेना और BRO ने मिलकर खोला रास्ता
धारचूला के उपजिलाधिकारी आशीष जोशी के अनुसार, भारत-चीन सीमा क्षेत्र में स्थित लिपुलेख मार्ग को खोलने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सेना और सीमा सड़क संगठन (BRO) के सहयोग से प्रयास किए गए।
संयुक्त प्रयासों के बाद मार्ग खोल दिया गया है और बीमार व्यापारी को लिपुलेख लाया जा रहा है। उन्हें हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए देहरादून स्थित आपदा प्रबंधन विभाग से भी संपर्क किया गया है।
प्रशासन का प्रयास है कि प्रेम सिंह गुंज्याल को जल्द से जल्द भारत लाकर समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। उनकी आगे की स्थिति और उपचार को लेकर आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
निष्कर्ष
पिथौरागढ़ जिले से जुड़ी ये दोनों घटनाएं अलग-अलग चुनौतियों को सामने लाती हैं। खलिया टॉप में वन विभाग की कार्रवाई ने पर्यटन गतिविधियों को निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित करने और प्राकृतिक धरोहर की रक्षा करने की जरूरत को रेखांकित किया है। वहीं, चीन में गंभीर रूप से बीमार पड़े व्यापारी को भारत लाने के लिए प्रशासन और सीमा पर तैनात एजेंसियों के संयुक्त प्रयास अहम साबित हुए हैं।
एक ओर पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन जरूरी है, तो दूसरी ओर सीमांत क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।


