BREAKING

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब सरकारी और निजी स्कूलों की होगी ग्रेडिंग

देहरादून, उत्तराखंड | 27 मई 2026

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों की ग्रेडिंग की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार एक स्वतंत्र विद्यालय मानक प्राधिकरण गठित करने जा रही है, जो स्कूलों के शैक्षणिक स्तर, सुविधाओं और मानकों का मूल्यांकन करेगा।

यह प्राधिकरण स्कूलों की ग्रेडिंग के आधार पर उन्हें प्रमाणपत्र जारी करेगा और शिक्षा क्षेत्र में एक नियामक संस्था के रूप में कार्य करेगा। माना जा रहा है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और स्कूलों के कामकाज पर प्रभावी निगरानी हो सकेगी।


प्रस्तावित विद्यालय मानक प्राधिकरण के गठन को लेकर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने नया प्रारूप तैयार कर शासन को भेज दिया है। अधिकारियों के मुताबिक पहले आए कुछ सुझावों और आपत्तियों के बाद प्रस्ताव में आवश्यक संशोधन किए गए हैं।

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर रोक लगाना है। सरकार का मानना है कि कई निजी स्कूल शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय के रूप में चला रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।


नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्कूलों का मूल्यांकन विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाएगा। इसमें शिक्षण गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाएं, विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध संसाधन, सुरक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की योग्यता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

ग्रेडिंग के आधार पर स्कूलों को अलग-अलग श्रेणियों में प्रमाणपत्र दिए जाएंगे, जिससे अभिभावकों को भी स्कूलों की वास्तविक स्थिति समझने में आसानी होगी।


विद्यालय मानक प्राधिकरण को एक स्वतंत्र बारह सदस्यीय बोर्ड के रूप में गठित किया जाएगा। बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकेगा।

प्राधिकरण को शिक्षा क्षेत्र में निगरानी और नियमन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इसमें स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया, मानकों का निर्धारण और नियमों के पालन की निगरानी प्रमुख रूप से शामिल होगी।


इसके अलावा यह प्राधिकरण एक मजबूत और सुलभ सार्वजनिक शिकायत निवारण तंत्र भी विकसित करेगा। अभिभावक, छात्र और शिक्षक स्कूलों से जुड़ी शिकायतें सीधे इस मंच पर दर्ज करा सकेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के मामलों में कमी आएगी।


प्राधिकरण स्कूलों की मान्यता के लिए शुल्क निर्धारण का अधिकार भी रखेगा। इससे स्कूलों में फीस और अन्य शुल्कों को लेकर पारदर्शिता लाने की कोशिश की जाएगी।

एससीईआरटी के अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी ने बताया कि प्राधिकरण की स्थापना को लेकर कुछ तकनीकी और प्रशासनिक आपत्तियां सामने आई थीं। इन सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।


शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों में गुणवत्ता सुधारने की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

हालांकि कुछ निजी स्कूल संचालकों की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर चिंता भी जताई जा रही है। उनका कहना है कि नई नियमावली लागू होने पर प्रशासनिक दबाव और प्रक्रियाएं बढ़ सकती हैं।


निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार का स्कूल ग्रेडिंग और विद्यालय मानक प्राधिकरण बनाने का फैसला शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार माना जा रहा है। इससे स्कूलों की जवाबदेही तय होगी, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और अभिभावकों को अधिक पारदर्शी व्यवस्था मिल सकेगी। आने वाले समय में यह पहल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *