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ऋषिकेश में ‘यशोदा एआई एवं महिला’ राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित, मातृशक्ति को एआई, साइबर सुरक्षा और डिजिटल कानूनों का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

ऋषिकेश, उत्तराखंड | 1 सितंबर 2026

उत्तराखंड राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में ऋषिकेश में महिलाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, साइबर सुरक्षा और कानूनी अधिकारों से जोड़ने के उद्देश्य से एक दिवसीय राज्य स्तरीय जागरूकता एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का विषय ‘यशोदा एआई एवं महिला’ रहा।

पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यशाला का शुभारंभ

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि ऋषिकेश विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल, उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल, ऋषिकेश नगर निगम के महापौर शंभू पासवान, परिसर निदेशक प्रो. महावीर सिंह रावत, आयोग की उपाध्यक्ष चंद्रकला तिवारी तथा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इसके बाद राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूक बनाने और उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना रहा।

एआई क्रांति और आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार हैं भारत की महिलाएं

उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की पहचान यहां की संघर्षशील, मेहनती और नेतृत्वकारी मातृशक्ति से जुड़ी रही है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीक से डरने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि महिलाओं को इसे सीखकर अपने दैनिक जीवन, शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय में सकारात्मक रूप से उपयोग करना चाहिए।

कुसुम कण्डवाल ने कहा कि दुनिया अब केवल कंप्यूटर और इंटरनेट तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में महिलाओं की भागीदारी तकनीकी और आर्थिक विकास में लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की एआई क्रांति और आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए भारत की महिलाएं पूरी तरह सक्षम, आत्मविश्वासी और तैयार हैं।

विज्ञान, स्पेस टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बढ़ रही महिलाओं की भूमिका

कुसुम कण्डवाल ने कहा कि महिलाएं अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, आईटी, स्पेस टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में भी महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी स्टार्टअप, स्वरोजगार, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई योजनाओं और पहलों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है। आधुनिक तकनीक में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

महिलाओं को तकनीक के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति भी किया जागरूक

राज्य महिला आयोग अध्यक्ष ने महिलाओं से आधुनिक तकनीक और एआई का उपयोग करने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के प्रति भी सतर्क रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में अवसरों के साथ कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एआई तकनीक का उपयोग करते समय व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल पहचान की सुरक्षा बेहद आवश्यक है।

उन्होंने महिलाओं से कहा कि तकनीक का सही ज्ञान उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल बोले, तकनीक ने बदली हर क्षेत्र की कार्यप्रणाली

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं ऋषिकेश विधायक डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि तकनीक के विकास ने समाज और कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव किए हैं।

उन्होंने कहा कि टाइपराइटर के दौर से शुरू हुई तकनीकी यात्रा आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग तक पहुंच चुकी है। आधुनिक तकनीक का प्रभाव कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवसाय और प्रशासन सहित लगभग हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि आज किसान मौसम से संबंधित जानकारी और पूर्वानुमान प्राप्त कर रहे हैं, जबकि छात्र आधुनिक डिजिटल माध्यमों और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर अपनी पढ़ाई को अधिक प्रभावी बना रहे हैं।

महापौर बोले, एआई मानवीय विवेक का स्थान नहीं ले सकता

ऋषिकेश नगर निगम के महापौर शंभू पासवान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक भले ही तेजी से विकसित हो रही हो, लेकिन यह मानवीय विवेक, संवेदनशीलता और निर्णय क्षमता का स्थान पूरी तरह नहीं ले सकती।

उन्होंने कहा कि लोगों को तकनीक के सकारात्मक और उपयोगी पहलुओं को अपनाना चाहिए और उसका जिम्मेदारी के साथ प्रयोग करना चाहिए।

युवाओं को रोबोटिक्स और एआई स्किल्स विकसित करने की सलाह

परिसर निदेशक प्रो. महावीर सिंह रावत ने कहा कि भविष्य की दुनिया तकनीक और नवाचार से जुड़ी होगी। ऐसे में युवाओं को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य आधुनिक तकनीकी कौशल विकसित करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करते समय विवेक और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देना जरूरी है।

साइबर अपराधों से बचाव की दी गई विस्तृत जानकारी

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में उत्तराखंड पुलिस की स्टेट सोशल मीडिया टीम से जुड़ी पुलिस उपनिरीक्षक रवीना ने महिलाओं और बच्चों को प्रभावित करने वाले प्रमुख साइबर अपराधों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने साइबर स्टॉकिंग, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, डीपफेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग, फिशिंग और अन्य ऑनलाइन अपराधों से बचाव के उपाय बताए।

प्रतिभागियों को सोशल मीडिया अकाउंट को सुरक्षित रखने, मजबूत पासवर्ड बनाने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने और निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

ऑनलाइन अपराध होने पर सबूत सुरक्षित रखने की अपील

साइबर सुरक्षा सत्र के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी भी प्रकार के ऑनलाइन अपराध, धोखाधड़ी या ब्लैकमेल की स्थिति में घबराने के बजाय डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए।

स्क्रीनशॉट, संबंधित यूआरएल और अन्य आवश्यक डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने के बाद तत्काल संबंधित एजेंसियों को शिकायत करने की सलाह दी गई।

प्रतिभागियों को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और आधिकारिक साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।

एआई को बताया गया डिजिटल आईना

सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी उत्तराखंड के विशेषज्ञ रविशंकर सिंह ने एआई को डिजिटल आईना बताते हुए कहा कि यह शिक्षा, कंटेंट निर्माण और व्यवसाय की दुनिया में बड़े बदलाव ला रहा है।

उन्होंने बताया कि एआई व्यक्तिगत ट्यूटर की तरह काम कर सकता है और पढ़ाई से जुड़े विषयों को समझने, पुस्तकों का सार तैयार करने तथा विभिन्न भाषाओं में सीखने में सहायता कर सकता है।

उन्होंने करियर निर्माण के लिए एआई के उपयोग, प्रभावी रिज्यूमे तैयार करने, इंटरव्यू की तैयारी, डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन और व्यवसायिक विचारों को विकसित करने से संबंधित जानकारी भी दी।

लाइव एआई टूल्स और प्रॉम्प्टिंग का कराया गया अभ्यास

आईटीडीए के तन्मय धवन ने प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स का लाइव प्रदर्शन कराकर उनके उपयोग की जानकारी दी।

कार्यशाला में महिलाओं और छात्राओं को बेसिक प्रॉम्प्टिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने सीधे एआई टूल्स का उपयोग कर यह समझने का प्रयास किया कि सही प्रॉम्प्ट के माध्यम से तकनीक से बेहतर परिणाम कैसे प्राप्त किए जा सकते हैं।

इस व्यावहारिक प्रशिक्षण को कार्यशाला का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

मोबाइल डाटा और क्लाउड प्राइवेसी पर विशेष सत्र

साइबर एक्सपर्ट पुलिस उपनिरीक्षक दीप्ति लोहनी ने मोबाइल डाटा की सुरक्षा, क्लाउड प्राइवेसी और मोबाइल एप्लीकेशन की परमिशन से जुड़े जोखिमों पर जानकारी दी।

उन्होंने प्रतिभागियों को अनावश्यक ऐप परमिशन देने से बचने और व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।

डिजिटल कानून और एआई जनित अपराधों की दी जानकारी

साइबर और एआई कानून विशेषज्ञ अधिवक्ता जानवी शर्मा ने प्रतिभागियों को डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन से जुड़े प्रावधानों, सूचना प्रौद्योगिकी कानून और एआई तकनीक से जुड़े संभावित अपराधों के खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ नागरिकों को अपने कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होना भी आवश्यक है।

विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित

कार्यशाला के समापन अवसर पर अतिथियों द्वारा कार्यक्रम में योगदान देने वाले विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को सम्मान प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।

कार्यक्रम का मंच संचालन सुनील थपलियाल ने किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत और दीप गीत प्रस्तुत किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भूमिका रावत एंड ग्रुप द्वारा पारंपरिक गढ़वाली समूह नृत्य प्रस्तुत किया गया। वहीं संगीतकार दिया शाह और शुभम जोशी ने विशेष सांगीतिक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।

सदस्य सचिव उर्वशी चौहान ने किया धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम के अंत में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की सदस्य सचिव उर्वशी चौहान ने सभी अतिथियों, विषय विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय प्रशासन और कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का विधिवत समापन हुआ।

इस अवसर पर पुलिस क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश तुषार बोरा, महिला आयोग सदस्य विमला नैथानी, कमला जोशी, प्रेमलता, अनुका कक्कड़, पूर्व पार्षद सुंदरी कंडवाल, पार्षद माधवी गुप्ता, डॉ. शशि कंडवाल, शशि राणा, रेखा चमोली, गुड्डी कलगुड़ा, आधार वर्मा, अनीता डिमरी, मीनाक्षी मेठाणी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

निष्कर्ष

ऋषिकेश में आयोजित ‘यशोदा एआई एवं महिला’ राज्य स्तरीय कार्यशाला महिलाओं को भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग, लाइव प्रॉम्प्टिंग, साइबर सुरक्षा, डाटा प्राइवेसी और डिजिटल कानूनों की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यशाला का मुख्य संदेश यही रहा कि भारत और उत्तराखंड की महिलाएं आधुनिक तकनीक के युग में पीछे रहने के बजाय नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। सही प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता के माध्यम से मातृशक्ति शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।

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