स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 8 अगस्त 2026
देहरादून: स्थानीय भाषा में मतदाताओं से संवाद पर जोर, बारिश और दुर्गम क्षेत्रों में दस्तावेज जुटाने के लिए अधिकारियों को दी गई विशेष जिम्मेदारी
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दूसरे चरण की प्रक्रिया के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने शनिवार को प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के आयुक्तों के साथ सभी जिलाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े कार्यों, फील्ड स्तर की चुनौतियों और लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
फॉर्म 6, 7 और 8 की स्थिति की समीक्षा
बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की वर्तमान स्थिति की जानकारी जिलाधिकारियों से ली। फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-7 मतदाता सूची से नाम हटाने और फॉर्म-8 मतदाता के पते अथवा अन्य विवरण में संशोधन से संबंधित है।
सीईओ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन फॉर्मों की जांच, सत्यापन और फॉलोअप में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। मतदाताओं से प्राप्त जानकारी की वास्तविकता सुनिश्चित करने के साथ ही लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाए।
बीएलओ और फील्ड स्टाफ का मनोबल बढ़ाने पर जोर
डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया को धरातल पर पहुंचाने में बूथ लेवल अधिकारियों और फील्ड स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अधिकारियों से फील्ड कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के साथ उनकी सुविधा, आराम और सुरक्षा का भी ध्यान रखने को कहा।
उन्होंने माना कि प्रदेश के पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में मौसम, बारिश, सड़क और यातायात से जुड़ी परिस्थितियों के कारण फील्ड टीमों को कई जगहों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को परिस्थितियों के अनुसार संवेदनशील और व्यावहारिक तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
बारिश से प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था
बैठक में बारिश के कारण प्रभावित क्षेत्रों में एसआईआर कार्य को लेकर भी चर्चा हुई। सीईओ ने निर्देश दिए कि जहां प्रतिकूल मौसम या आवाजाही की समस्या के कारण बीएलओ का पहुंचना मुश्किल है, वहां उपलब्ध दस्तावेज प्राप्त कर नियमानुसार रिपोर्ट तैयार की जाए और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले मतदाताओं को केवल भौगोलिक कठिनाइयों के कारण प्रक्रिया से वंचित न होना पड़े, इसके लिए स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था और समन्वय को मजबूत किया जाए।
देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में नोटिस सुनवाई पर विशेष फोकस
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों को नोटिस से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। जिन मतदाताओं के नामों को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं या जिनके दस्तावेजों में किसी प्रकार की विसंगति मिली है, उनकी सुनवाई निष्पक्ष और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कराने पर जोर दिया गया।
सीईओ ने स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। संबंधित मतदाता को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त अवसर और सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
आयुक्तों से फील्ड विजिट का लिया फीडबैक
बैठक के दौरान कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप से उनके हालिया जिला भ्रमण के संबंध में भी जानकारी ली गई। दोनों मंडलायुक्तों ने अपने फील्ड दौरे के दौरान सामने आई व्यावहारिक चुनौतियों और स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान प्राप्त फीडबैक से मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अवगत कराया।
सीईओ ने दोनों आयुक्तों को आगे भी नियमित फील्ड विजिट जारी रखने के निर्देश दिए, ताकि एसआईआर की वास्तविक स्थिति का मौके पर आकलन किया जा सके और समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान किया जा सके।
अनमैप्ड मतदाताओं की सुनवाई के लिए रणनीति बनाने के निर्देश
बैठक में अनमैप्ड मतदाताओं से जुड़े मामलों पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ईआरओ और एईआरओ को ऐसे मतदाताओं की सुनवाई के लिए सुविधाजनक रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सुनवाई के लिए ऐसा समय और स्थान तय किया जाए, जहां संबंधित मतदाता आसानी से पहुंचकर अपनी बात रख सके। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के साथ प्रत्येक मामले का नियमानुसार परीक्षण किया जाए।
स्थानीय भाषा में संवाद और संवेदनशील व्यवहार पर जोर
सीईओ ने फील्ड टीमों को निर्देश दिए कि मतदाताओं से बातचीत करते समय स्थानीय भाषा और क्षेत्रीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में मतदाताओं के मन में किसी प्रकार की भ्रांति या आशंका नहीं रहनी चाहिए।
विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांग मतदाताओं और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ अतिरिक्त संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए गए। फील्ड स्टाफ को मतदाताओं की बात धैर्यपूर्वक सुनने और उन्हें प्रक्रिया की सही जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया।
निष्कर्ष
एसआईआर के दूसरे चरण को लेकर हुई यह समीक्षा बैठक फील्ड स्तर पर चल रही प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निर्वाचन विभाग ने एक ओर जहां मतदाता सूची से जुड़े फॉर्मों की जांच और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया है, वहीं दूसरी ओर दुर्गम क्षेत्रों, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद मतदाताओं तक प्रक्रिया की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि एसआईआर के दौरान प्रत्येक पात्र मतदाता को अपनी बात रखने और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में भाग लेने का उचित अवसर मिलना चाहिए।


