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मसूरी-कैंपटी मार्ग पर सैंजी गांव के पास मुख्य पाइपलाइन का जोड़ खुला, हजारों लीटर पानी बहा; जल निगम ने पंपिंग रोककर शुरू कराया मरम्मत कार्य

144 करोड़ की यमुना पेयजल योजना की पाइपलाइन फटी, सड़क पर फूटा पानी का फव्वारा; गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल

स्थान: मसूरी, देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 8 अगस्त 2026

मसूरी में पेयजल संकट से स्थायी राहत देने के उद्देश्य से तैयार की गई करीब 144 करोड़ रुपये की यमुना पेयजल पंपिंग योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शुक्रवार को मसूरी-कैंपटी रोड पर सैंजी गांव के पास योजना की मुख्य पाइपलाइन का जोड़ अचानक खुल गया। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होते ही तेज दबाव के साथ पानी सड़क पर निकलने लगा और कुछ ही देर में सड़क पर फव्वारे जैसा दृश्य बन गया।

तेज दबाव से सड़क पर बहने लगा पानी

मुख्य पाइपलाइन से अचानक बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकलने के कारण सड़क का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया। पानी तेज बहाव के साथ सड़क पर फैलता रहा, जिससे मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।

पाइपलाइन से निकलती पानी की तेज धार को देखकर राहगीर और पर्यटक भी मौके पर रुक गए। कई लोगों ने पानी के इस फव्वारे का वीडियो बनाया और तस्वीरें खींचीं। हालांकि, जिस घटना को कुछ लोगों ने कौतूहल के रूप में देखा, उसने पेयजल की बर्बादी और योजना की तकनीकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।


स्थानीय लोगों ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यमुना पेयजल योजना की पाइपलाइन में खराबी की यह पहली घटना नहीं है। लोगों के अनुसार योजना के तहत सड़क के नीचे बिछाई गई पाइपलाइन में पहले भी तकनीकी दिक्कतें सामने आती रही हैं।

बार-बार पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से जहां बड़ी मात्रा में पेयजल बर्बाद होता है, वहीं सड़क को भी नुकसान पहुंचता है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत वाली योजना में यदि बार-बार इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं तो निर्माण गुणवत्ता, पाइपलाइन के जोड़ों और तकनीकी निगरानी की जांच जरूरी है।


करोड़ों की योजना, फिर भी बार-बार सामने आ रही खामियां

यमुना पेयजल पंपिंग योजना को मसूरी की दीर्घकालिक पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जाता है। योजना का उद्देश्य मसूरी की बढ़ती आबादी और पर्यटन के कारण लगातार बढ़ रही पानी की मांग को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2054 तक पेयजल उपलब्धता को मजबूत करना है।

ऐसे में योजना की मुख्य पाइपलाइन में बार-बार तकनीकी समस्या सामने आने से इसकी विश्वसनीयता और रखरखाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और पाइपलाइन के निर्माण तथा जोड़ की गुणवत्ता का परीक्षण कराने की मांग की है।


सूचना मिलते ही बंद की गई पंपिंग

जल निगम के सहायक अभियंता बी. निराला ने बताया कि पाइपलाइन का जोड़ खुलने के कारण लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी। लीकेज की सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम से पंपिंग बंद कर दी गई, जिससे पाइपलाइन में पानी का दबाव कम किया जा सके।

इसके बाद जल निगम की टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम शुरू किया गया। विभाग के अनुसार, तत्काल पंपिंग बंद किए जाने से पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद मिली।


शनिवार सुबह सामान्य हुई जलापूर्ति

जल निगम के सहायक अभियंता के मुताबिक, मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद शनिवार सुबह तक पाइपलाइन को दुरुस्त कर दिया गया और जलापूर्ति व्यवस्था को सामान्य कर दिया गया।

हालांकि, इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पाइपलाइन की तकनीकी जांच और नियमित निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।


पर्यटन सीजन में पेयजल व्यवस्था के लिए अहम है योजना

मसूरी उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। पर्यटन सीजन के दौरान यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ पेयजल की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में यमुना पेयजल पंपिंग योजना को शहर की भविष्य की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजना माना जा रहा है।

यदि इतनी बड़ी परियोजना की पाइपलाइन में बार-बार लीकेज और क्षति की समस्या सामने आती है, तो इससे न केवल पानी की बर्बादी होती है, बल्कि शहर की पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर अब योजना की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो रही है।


निष्कर्ष

144 करोड़ रुपये की यमुना पेयजल पंपिंग योजना मसूरी को वर्ष 2054 तक पेयजल संकट से राहत देने के उद्देश्य से तैयार की गई है। ऐसे में इसकी मुख्य पाइपलाइन का बार-बार क्षतिग्रस्त होना गंभीर विषय है। फिलहाल जल निगम ने पाइपलाइन की मरम्मत कर जलापूर्ति बहाल कर दी है, लेकिन घटना ने परियोजना की निर्माण गुणवत्ता, पाइपलाइन के जोड़ों और नियमित रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की तकनीकी जांच कर खामियों की वास्तविक वजह सामने लाई जाए, ताकि भविष्य में पेयजल की बर्बादी और सड़क क्षति जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

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