महिलाओं और छात्राओं की समस्याएं सुनीं, आवागमन व स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए समर्पित वाहन उपलब्ध कराने के दिए निर्देश
दिनांक: 8 जुलाई 2026
स्थान: कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
कोटद्वार: उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मंगलवार को कोटद्वार स्थित नारी पुनर्वास केंद्र का औचक निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र में रह रही महिलाओं और युवतियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सरकारी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पहुंचीं पुनर्वास केंद्र
अपने कोटद्वार दौरे के दौरान महिला आयोग अध्यक्ष ने सबसे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित “जन-जन की सरकार, आपके द्वार” कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। जिला उद्योग केंद्र कोटद्वार में आयोजित कार्यक्रम के समापन के बाद वह सीधे नारी पुनर्वास केंद्र पहुंचीं, जहां उन्होंने बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया।
सुरक्षा, आवास और भोजन व्यवस्था का किया निरीक्षण
कुसुम कंडवाल ने पुनर्वास केंद्र में महिलाओं के लिए उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्था, रहने की सुविधाएं, भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई तथा अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र के अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली और निरीक्षण के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड का भी अवलोकन किया।
अध्यक्ष ने अधिकारियों से कहा कि पुनर्वास केंद्र में रहने वाली प्रत्येक महिला और युवती को सम्मानजनक, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
वर्तमान में सात महिलाएं और युवतियां रह रही हैं केंद्र में
निरीक्षण के दौरान जानकारी दी गई कि वर्तमान समय में नारी पुनर्वास केंद्र में सात महिलाएं और युवतियां रह रही हैं। केंद्र की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के बाद अध्यक्ष ने संतोष व्यक्त किया कि यहां महिलाओं के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से उस छात्रा का उल्लेख किया, जो पहले इसी केंद्र में रह चुकी है और वर्तमान में बी.टेक (B.Tech) की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने इसे पुनर्वास केंद्र के सकारात्मक वातावरण और बेहतर मार्गदर्शन का परिणाम बताया।
महिलाओं ने रखीं आवागमन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान केंद्र में रह रही महिलाओं और छात्राओं ने आयोग अध्यक्ष को अपनी दैनिक समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विद्यालय और कॉलेज काफी दूरी पर होने के कारण नियमित रूप से आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा केंद्र में रह रही गर्भवती महिलाओं ने समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचने और आपातकालीन परिस्थितियों में परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई।
वाहन की व्यवस्था के लिए तत्काल दिए निर्देश
महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कुसुम कंडवाल ने मौके से ही आईसीडीएस के निदेशक बी.एल. राणा से दूरभाष पर संपर्क किया। उन्होंने नारी पुनर्वास केंद्र की आवश्यकताओं की जानकारी देते हुए महिलाओं और गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए केंद्र में समर्पित वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं तक महिलाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
निरीक्षण रजिस्टर में दर्ज किए आवश्यक निर्देश
निरीक्षण के दौरान आयोग अध्यक्ष ने केंद्र के निरीक्षण रजिस्टर में भी अपने सुझाव और आवश्यक निर्देश दर्ज किए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
अधिकारियों को दी संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की सलाह
कुसुम कंडवाल ने पुनर्वास केंद्र के अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे केंद्र में रहने वाली महिलाओं और युवतियों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील रहें। उन्होंने कहा कि पुनर्वास केंद्र केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
निरीक्षण के दौरान विभाग की प्रशासनिक अधिकारी विजयलक्ष्मी, सुपरवाइजर तथा अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
कोटद्वार स्थित नारी पुनर्वास केंद्र के औचक निरीक्षण के दौरान उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने महिलाओं और छात्राओं की वास्तविक समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए। विशेष रूप से आवागमन और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समर्पित वाहन की व्यवस्था पर जोर देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्वास केंद्रों में रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


