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दून अस्पताल में शर्मसार कर देने वाली घटना, इलाज के लिए लाए पिता को स्ट्रेचर पर छोड़कर चला गया बेटा

देहरादून, उत्तराखंड | शनिवार, 23 मई 2026

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। जिस बेटे की परवरिश के लिए एक पिता ने पूरी जिंदगी मेहनत और संघर्ष में गुजार दी, वही बेटा बुजुर्ग पिता को अस्पताल के स्ट्रेचर पर दर्द से तड़पता छोड़कर चला गया। यह घटना न केवल पारिवारिक संवेदनाओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में बढ़ती संवेदनहीनता की भी दर्दनाक तस्वीर पेश करती है।ξ

जानकारी के अनुसार गढ़ी कैंट क्षेत्र के टपकेश्वर निवासी 71 वर्षीय सुरेश त्यागी घरों में पुताई का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। करीब छह दिन पहले वह रोज की तरह काम पर जाने के लिए घर से निकले थे, तभी रास्ते में एक स्कूटी चालक ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में उनके दाएं पैर में गंभीर चोट लग गई।

घटना के बाद सुरेश त्यागी ने शुरुआत में घर पर ही आराम किया और उम्मीद जताई कि कुछ दिनों में दर्द ठीक हो जाएगा। लेकिन समय बीतने के साथ दर्द बढ़ता गया और उनकी चलने-फिरने की स्थिति खराब हो गई। असहनीय पीड़ा के चलते उन्होंने अपने बेटे से अस्पताल ले जाने की गुहार लगाई।

शुक्रवार सुबह उनका बेटा अपने एक दोस्त के साथ उन्हें दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचा। ऑर्थोपेडिक विभाग में डॉक्टरों ने जांच के दौरान पैर में गंभीर अंदरूनी चोट और फ्रैक्चर की आशंका जताई। डॉक्टरों ने तत्काल एक्स-रे और अन्य जरूरी जांच कराने के निर्देश दिए ताकि उन्हें भर्ती कर उपचार शुरू किया जा सके।

अस्पताल में एक्स-रे और अन्य जांचों का बिल करीब 935 रुपये आया। बेटे ने बिलिंग काउंटर पर पैसे जमा कर सभी जांचें करवा दीं। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने अस्पताल स्टाफ और वहां मौजूद लोगों को भी स्तब्ध कर दिया।

बताया जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद बेटे ने स्ट्रेचर पर लेटे अपने पिता से कहा कि उसने अस्पताल में खर्च किए गए रुपये अपने दोस्त से उधार लिए हैं और अब वह रकम तुरंत वापस करनी होगी। जब बुजुर्ग पिता ने आर्थिक तंगी और लाचारी का हवाला देते हुए पैसे देने में असमर्थता जताई, तो बेटा उन्हें उसी हालत में अस्पताल में छोड़कर चला गया।

करीब तीन घंटे तक सुरेश त्यागी अस्पताल के स्ट्रेचर पर दर्द से कराहते रहे। आसपास मौजूद लोग उन्हें देखते रहे, लेकिन उनका बेटा वापस नहीं लौटा। काफी देर तक बुजुर्ग को अकेला पड़ा देखकर अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों को शक हुआ। उन्होंने आगे बढ़कर बुजुर्ग से बातचीत की और फिर उनके मोबाइल से पत्नी को फोन कर पूरी जानकारी दी।

सुरेश त्यागी की पत्नी एक स्कूल में मात्र चार हजार रुपये मासिक वेतन पर सुरक्षा गार्ड की नौकरी करती हैं। सूचना मिलने के बाद उन्होंने किसी तरह स्कूल से छुट्टी ली और अस्पताल पहुंचीं। पति की हालत देखकर वह भावुक हो गईं।

अस्पताल में मौजूद लोगों के मुताबिक यह घटना बेहद पीड़ादायक थी। एक तरफ बुजुर्ग पिता दर्द से कराह रहा था, दूसरी तरफ उसे सहारा देने वाला बेटा उसे बेसहारा छोड़कर जा चुका था। घटना ने अस्पताल परिसर में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में पारिवारिक रिश्तों में संवेदनशीलता कम होती जा रही है। बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा और अकेलेपन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो चिंता का विषय है।

निष्कर्ष

देहरादून के दून अस्पताल में सामने आई यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि समाज के बदलते चेहरे की दर्दनाक हकीकत है। जिस पिता ने पूरी जिंदगी अपने बेटे के भविष्य के लिए संघर्ष किया, उसी पिता को वृद्धावस्था में अस्पताल के स्ट्रेचर पर अकेला छोड़ दिया गया। यह घटना रिश्तों में घटती संवेदनशीलता और बुजुर्गों के प्रति बढ़ती उपेक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। समाज को यह समझने की जरूरत है कि माता-पिता केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं।

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