देहरादून | 28 जुलाई 2026
उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन सड़कों में शामिल देहरादून-मसूरी मार्ग एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवादों में है। पिछले वर्ष आपदा के बाद लगभग 1.95 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए मरम्मत और सुरक्षा कार्य मानसून की पहली तेज बारिश में ही कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सड़क पर दरारें, धंसाव और रिटेनिंग वॉल के टूटने की घटनाओं ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पिछले वर्ष की आपदा के बाद कराया गया था व्यापक पुनर्निर्माण
सितंबर 2025 में हुई भारी बारिश ने देहरादून-मसूरी मार्ग को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। शिव मंदिर से गालोगी (गलेगी) बैंड तक सड़क के कई हिस्से बह गए थे, जबकि अनेक स्थानों पर रिटेनिंग वॉल, पुश्ते और सड़क की एप्रोच क्षतिग्रस्त हो गई थी। मार्ग बंद होने के बाद लोक निर्माण विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण और सुरक्षा कार्य शुरू कराए थे।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार सड़क के अलग-अलग हिस्सों में कुल 10 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए, जिनकी अनुबंध राशि लगभग 1.94 करोड़ रुपये रही। इनमें से करीब 1.91 करोड़ रुपये का भुगतान संबंधित ठेकेदारों को किया जा चुका है।
पहली ही बारिश में सामने आई निर्माण कार्यों की हकीकत
मरम्मत कार्य पूरा होने के करीब दस महीने बाद मानसून की पहली तेज बारिश ने सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए। पानी वाला बैंड क्षेत्र में हाल ही में निर्मित रिटेनिंग पुश्ता भरभराकर गिर गया। इसके अलावा कई स्थानों पर सड़क में चौड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं, जबकि कुछ हिस्सों में सड़क धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़क पहली ही बारिश का सामना नहीं कर पाई, तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लगभग दो करोड़ की लागत से हुए थे सुरक्षा कार्य
दस्तावेजों के अनुसार आपदा के बाद क्षतिग्रस्त दीवारों, रिटेनिंग वॉल, एप्रोच रोड और सुरक्षा संरचनाओं के निर्माण के लिए अलग-अलग अनुबंध किए गए थे। इनमें सबसे बड़ा कार्य लगभग 54 लाख रुपये का था, जबकि अन्य परियोजनाओं की लागत 7 लाख से 20 लाख रुपये के बीच रही।
इन सभी कार्यों का उद्देश्य भविष्य में भूस्खलन और बारिश से सड़क को सुरक्षित बनाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता
देहरादून-मसूरी मार्ग पर प्रतिदिन हजारों स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में सड़क के किनारों पर उभरती दरारें, धंसते हिस्से और क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवारें दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा रही हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही सड़क की यह स्थिति है तो लगातार बारिश के दौरान हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
पूर्व पालिकाध्यक्ष ने लगाए भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोप
मसूरी नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने पूरे मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान पर पिछले वर्ष आपदा के दौरान रिटेनिंग वॉल टूटी थी, वहीं दोबारा बनाई गई दीवार पहली ही बरसात में फिर ढह गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया गया और मजबूत संरचना तैयार करने के बजाय जल्दबाजी में मिट्टी भरकर कार्य पूरा कर दिया गया। उनके अनुसार देहरादून-मसूरी मार्ग पर कई ऐसे स्थान हैं, जहां पिछले वर्ष बनाए गए पुश्ते और रिटेनिंग वॉल अब दोबारा कमजोर पड़ चुके हैं।
उन्होंने गालोगी क्षेत्र में सड़क के दोबारा धंसने पर भी चिंता जताते हुए कहा कि समय रहते तकनीकी परीक्षण और स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
जल निकासी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
अनुज गुप्ता ने निर्माण कार्यों में ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी को भी प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि कई स्थानों पर कल्वर्ट बंद पड़े हैं, जिससे वर्षा का पानी सीधे सड़क के ऊपर से बह रहा है। इससे सड़क की नींव कमजोर हो रही है और रिटेनिंग वॉल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यदि निर्माण के दौरान वैज्ञानिक तरीके से जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाती तो सड़क को इतना नुकसान नहीं होता।
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
स्थानीय निवासी अमन जैदवान का कहना है कि मसूरी रोड की हालत लगातार खराब होती जा रही है। पिछले वर्ष जिन स्थानों पर सड़क और सुरक्षा कार्य किए गए थे, वहीं अब फिर दरारें और धंसाव दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा कुछ नए क्षेत्रों में भी भूस्खलन और सड़क टूटने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
वहीं स्थानीय निवासी दीपक दयाल का कहना है कि आपदा के बाद हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। अभी इन कार्यों को एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है और सड़क तथा रिटेनिंग वॉल फिर से क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। उनके अनुसार निर्माण एजेंसियों ने गुणवत्ता मानकों का सही ढंग से पालन नहीं किया।
पीडब्ल्यूडी सचिव ने दिए तकनीकी जांच के निर्देश
लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि उन्होंने इस विषय पर विभाग के मुख्य अभियंता से चर्चा की है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिन नई सड़कों या सुरक्षा संरचनाओं में हाल ही में क्षति हुई है, वहां विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि नुकसान का वास्तविक कारण क्या है।
उन्होंने कहा कि किसी भी नई सड़क, रिटेनिंग वॉल या प्रोटेक्शन स्ट्रक्चर का एक ही मानसून में क्षतिग्रस्त होना स्वीकार्य नहीं है। यदि जांच में विभागीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि निर्माण एजेंसी या ठेकेदार जिम्मेदार पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी।
सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य केवल दोष तय करना नहीं, बल्कि समस्या का स्थायी समाधान निकालकर जनता को सुरक्षित और बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना है।
निष्कर्ष
देहरादून-मसूरी मार्ग उत्तराखंड की पर्यटन और परिवहन व्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पहली ही बारिश में सड़क और सुरक्षा संरचनाओं का क्षतिग्रस्त होना निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब सभी की नजर लोक निर्माण विभाग की तकनीकी जांच पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि नुकसान प्राकृतिक परिस्थितियों का परिणाम है या निर्माण कार्यों में हुई किसी प्रकार की लापरवाही का। यदि दोष तय होता है तो शासन ने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के संकेत भी दे दिए हैं।



