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देहरादून में बेरोजगारों का सचिवालय कूच, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका; सड़क पर धरने पर बैठे युवा, लंबित भर्तियां शुरू करने की मांग

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 21 जुलाई 2026

उत्तराखंड में लंबित सरकारी भर्तियों को लेकर युवाओं का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। मंगलवार को उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर देहरादून में सचिवालय कूच किया। हालांकि, सचिवालय पहुंचने से पहले ही पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके विरोध में युवा सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए लंबित भर्तियों को जल्द शुरू करने की मांग उठाई।

परेड ग्राउंड से शुरू हुआ मार्च, सचिवालय से पहले रोका गया

प्रदर्शनकारी सुबह परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए, जहां से उन्होंने सचिवालय की ओर पैदल मार्च शुरू किया। जैसे ही रैली सुभाष रोड पर सचिवालय के निकट पहुंची, पहले से तैनात पुलिस बल ने बैरिकेडिंग कर जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया।

पुलिस की कार्रवाई से नाराज बेरोजगारों ने मौके पर ही सड़क पर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।

एई, जेई और अन्य लंबित भर्तियों को जल्द शुरू करने की मांग

धरने के दौरान उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने राज्य सरकार और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से कई महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं को शीघ्र शुरू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में हजारों पद खाली पड़े हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया लगातार विलंब का शिकार हो रही है।

युवाओं की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—

  • उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से सहायक अभियंता (AE) और कनिष्ठ अभियंता (JE) भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
  • विभिन्न विभागों की सभी लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
  • उत्तराखंड पुलिस में 1500 पदों पर नई भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी किया जाए।
  • महिला पुलिस सिपाही के 400 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।

बेरोजगार संघ ने सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप

उत्तराखंड बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम कंडवाल ने प्रदर्शन के दौरान सरकार पर युवाओं के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही रोजगार के मुद्दे पर युवाओं की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य के युवाओं से 60 हजार सरकारी भर्तियां निकालने का वादा किया था, लेकिन अब तक यह घोषणा धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है। उनका कहना था कि यदि समय पर भर्ती विज्ञप्तियां जारी होतीं और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ती, तो युवाओं को आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग

राम कंडवाल ने आरोप लगाया कि राज्य के बाहर से आने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जबकि उत्तराखंड के शिक्षित युवा रोजगार के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा करते हुए भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही भर्ती संबंधी ठोस निर्णय नहीं लिए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

दिल्ली में युवाओं पर लाठीचार्ज की भी की निंदा

प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने हाल ही में दिल्ली में रोजगार संबंधी प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज की भी निंदा की। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले युवाओं के साथ बल प्रयोग उचित नहीं है और सरकारों को रोजगार के मुद्दे पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।

पुलिस व्यवस्था रही मुस्तैद

सचिवालय कूच को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। सचिवालय मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और बैरिकेडिंग के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति नियंत्रण में रही और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

निष्कर्ष

देहरादून में उत्तराखंड बेरोजगार संघ का सचिवालय कूच राज्य में लंबित सरकारी भर्तियों और रोजगार के मुद्दे को लेकर बढ़ती युवाओं की नाराजगी को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती प्रक्रियाओं को शीघ्र शुरू नहीं किया गया और रोजगार संबंधी लंबित घोषणाओं पर अमल नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अब निगाहें राज्य सरकार और संबंधित भर्ती एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे युवाओं की मांगों पर क्या निर्णय लेती हैं।

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