स्थान: मसूरी, जनपद देहरादून (उत्तराखंड)
तारीख: 21 जुलाई 2026
पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। सोमवार देर रात जेपी बैंड क्षेत्र में भारी बारिश के बीच पहाड़ी से अचानक आए मलबे ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के आवासों को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही मिनटों में मिट्टी, पत्थर और बड़े-बड़े बोल्डर घरों के भीतर घुस गए, जिससे कई परिवारों का सामान क्षतिग्रस्त हो गया। इस दौरान एक सात सदस्यीय परिवार ने समय रहते घर से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
आधी रात मची अफरा-तफरी, कमरों में भर गया मलबा
जानकारी के अनुसार, घटना के समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। देर रात तेज बारिश के बीच अचानक पहाड़ी से मलबे का तेज बहाव शुरू हुआ और देखते ही देखते मिट्टी, पत्थर तथा बोल्डर पीडब्ल्यूडी आवासों तक पहुंच गए।
प्रभावित परिवारों ने बताया कि कुछ ही मिनटों में घरों के कमरों में कई फीट तक मलबा भर गया। घरेलू सामान पूरी तरह मिट्टी में दब गया और लोगों को संभलने का भी मौका नहीं मिला। अचानक हुई इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
सात सदस्यीय परिवार बाल-बाल बचा
घटना के दौरान सबसे अधिक खतरा एक ऐसे परिवार पर मंडराया, जिसमें पति-पत्नी और उनके पांच बच्चे मौजूद थे। जैसे ही घर के भीतर मलबा घुसना शुरू हुआ, परिवार के सदस्यों में चीख-पुकार मच गई।
परिजनों ने किसी तरह तुरंत घर से बाहर भागकर अपनी जान बचाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि परिवार कुछ मिनट और देर कर देता तो बड़ा हादसा हो सकता था और जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्यों पर उठाए सवाल
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और प्रभावित परिवारों ने केवल भारी बारिश को इस हादसे की वजह मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि जेपी बैंड के ऊपरी हिस्से में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं और वहां से निकला मलबा नियमों की अनदेखी करते हुए ढलानों, जंगलों और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों में डाला गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों पुराने प्राकृतिक नालों को भी कई स्थानों पर बाधित कर दिया गया है। यही कारण है कि बारिश के दौरान मलबा पानी के साथ बहकर सीधे रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच गया और लोगों के घरों में तबाही मचा गया।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में अवैज्ञानिक निर्माण और मलबा निस्तारण की शिकायतें पहले भी कई बार संबंधित विभागों को दी गई थीं, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
लोगों ने सवाल उठाया कि यदि निर्माण गतिविधियों की नियमित निगरानी होती और मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराया जाता, तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था।
हालिया घटनाओं के बाद फिर उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मसूरी में पिछले कुछ वर्षों से लगातार भूस्खलन, सड़क धंसने और मलबा बहने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल ही में पानी वाले मोड़ पर सड़क धंसने की घटना के बाद अब जेपी बैंड में मलबा घरों में घुसने से पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की निगरानी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण के दौरान निकाले गए मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण नहीं होने पर वह बरसात के मौसम में बड़ी आपदा का रूप ले सकता है और नीचे बसे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय सभासद शिवानी भारती मौके पर पहुंचीं और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और यदि निर्माण कार्यों में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) राहुल आनंद ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजा। प्रशासन ने प्रभावित मकानों का निरीक्षण शुरू कर दिया है तथा नुकसान का आकलन कर राहत उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
निष्कर्ष
मसूरी के जेपी बैंड क्षेत्र में आधी रात हुआ यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा का मामला नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण, कमजोर जल निकासी व्यवस्था और मलबा प्रबंधन की चुनौतियों की ओर भी संकेत करता है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि समय रहते वैज्ञानिक निर्माण, प्रभावी निगरानी और सुरक्षित मलबा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। स्थानीय लोग अब प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।


