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नारी शक्ति वंदन अधिनियम से सशक्त होगा राष्ट्र निर्माण, देहरादून में गूंजा मातृशक्ति का स्वर

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 15 अप्रैल 2026

उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के तत्वावधान में देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के मुख्य सभागार में “नारी शक्ति वंदन सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। “पंचायत से पार्लियामेंट तक, निर्णय में नारी, नव भारत की तैयारी” थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि नारी शक्ति के बिना राष्ट्र और समाज की वास्तविक उन्नति की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” मातृशक्ति के सम्मान और अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। यह केवल महिलाओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि नीति-निर्माण में उनकी निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करने वाला परिवर्तन है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की महिला खेतों में अन्न उगाने वाली किसान भी है और स्टार्टअप खड़ा करने वाली उद्यमी भी। वह पंचायत से लेकर संसद तक नेतृत्व की भूमिका निभाने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30% आरक्षण लागू किया है और “समान नागरिक संहिता (UCC)” जैसे फैसलों से महिलाओं के अधिकारों को और मजबूत किया है।


उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना”, “सुकन्या समृद्धि योजना”, “जन-धन योजना” और “लखपति दीदी योजना” जैसी पहलों ने देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी है।


महिला सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, “सशक्त बहना उत्सव योजना” और “मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना” के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के जरिए स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास भी किया जा रहा है।


केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीति में सशक्त भागीदारी का अवसर देगा और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल करेगा।


प्रदेश की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने इसे महिलाओं के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया, जबकि दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने इसे महिलाओं के बौद्धिक नेतृत्व को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया।


राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अपने संबोधन में 33% महिला आरक्षण के लिए किए गए लंबे संघर्ष को याद करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाएं केवल नीति की लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माता बनेंगी।


कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 11 महिलाओं को सम्मानित किया गया। इनमें पद्मश्री माधवी बर्थवाल (लोक संस्कृति), अनुराधा मल्ला (शिक्षा), ममता रावत (उद्यमिता), किरण भट्ट (हॉस्पिटैलिटी), पारुल अग्रवाल (कम्युनिटी लीडरशिप), प्रिया गुलाटी (सामाजिक कार्य), दीपा बाछेती (स्वयं सहायता समूह), एडवोकेट रितु गुजराल (महिला एवं LGBTQ अधिकार), डॉ. रामा गोयल (समाज सेवा), निधि गोयल (ऊर्जा क्षेत्र) और डॉ. गीता जैन (शिक्षा) शामिल रहीं।


कार्यक्रम का संचालन दीप्ति रावत ने किया। इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।


निष्कर्ष:
देहरादून में आयोजित “नारी शक्ति वंदन सम्मेलन” ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि देश के विकास की धुरी अब मातृशक्ति के सशक्तिकरण पर केंद्रित है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी केवल सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे नीति-निर्माण के केंद्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएंगी।

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