देहरादून, उत्तराखंड | 27 मई 2026
उत्तराखंड में प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से धरने पर बैठे पीआरडी जवानों ने अब सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
पीआरडी जवान गुरुवार 28 मई को विभागीय मंत्री रेखा आर्य के यमुना कॉलोनी स्थित आवास के लिए कूच करेंगे। आंदोलनकारी जवानों का कहना है कि वे राज्य सरकार के लगातार मिल रहे आश्वासनों से परेशान हो चुके हैं और अब उन्हें केवल ठोस फैसला चाहिए।
प्रांतीय रक्षक दल हित संगठन के जिलाध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट ने बताया कि एकता विहार धरनास्थल पर पीआरडी जवानों का धरना बुधवार को 71वें दिन भी जारी रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछले कई वर्षों से सिर्फ वादे कर रही है, लेकिन जवानों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
संगठन का कहना है कि पीआरडी जवान बेहद कम मानदेय और सीमित कार्यदिवसों में काम करने को मजबूर हैं। ऐसे में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, बावजूद इसके सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही।
संगठन पदाधिकारियों ने बताया कि 18 मार्च 2026 से आंदोलन की शुरुआत की गई थी। इसके बाद 22 मार्च को कैंडल मार्च निकाला गया, जबकि 25 मार्च को मुख्यमंत्री आवास कूच कर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की गई। इसके अलावा 2 अप्रैल को सचिवालय कूच भी किया गया था।
आंदोलन के बढ़ते दबाव के बाद 6 अप्रैल को विभागीय मंत्री रेखा आर्य की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में विभागीय सचिव अमित सिन्हा, संबंधित अधिकारी और संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। उस दौरान मंत्री ने पीआरडी जवानों की दो सूत्रीय मांगों को लेकर प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट में लाने का आश्वासन दिया था।
पीआरडी जवानों का आरोप है कि मंत्री के आश्वासन के बाद उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया था, लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने और दो कैबिनेट बैठकों के बावजूद उनकी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इससे जवानों में भारी नाराजगी है।
संगठन ने साफ कहा है कि अब केवल बैठकों और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। जब तक शासनादेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
पीआरडी जवानों की प्रमुख मांगें
- पीआरडी जवानों को वर्ष के 365 दिन रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
- होमगार्ड की तर्ज पर समान कार्य के लिए समान वेतन और मूल वेतन पर महंगाई भत्ता (डीए) दिया जाए।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले 21 से 22 वर्षों से अलग-अलग सरकारों द्वारा केवल घोषणाएं और आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन आज तक पीआरडी जवानों की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें जवानों का इस्तेमाल तो करती हैं, लेकिन उनके भविष्य और अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं हैं।
धरना स्थल पर मौजूद जवानों ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी और यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में पीआरडी जवानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। लगातार लंबे समय से धरने पर बैठे जवान सरकार से ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं। मंत्री आवास कूच के ऐलान ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी जवानों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


