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रिटायर्ड अफसर के बेटे ने ओढ़ी फर्जी IPS की पहचान, दो बार UPSC में असफल होने के बाद ठगी का बनाया नेटवर्क

देहरादून | 16 जुलाई 2026

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में राजपुर थाना पुलिस ने खुद को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का अधिकारी बताकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान आर. यशोवर्धन (35 वर्ष) के रूप में हुई है, जो एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी का बेटा बताया जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बचपन से अधिकारियों का रुतबा और प्रभाव देखकर स्वयं भी अधिकारी बनने का सपना देखता था, लेकिन दो बार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में असफल रहने के बाद उसने फर्जी पहचान के सहारे लोगों को ठगना शुरू कर दिया।

बचपन का सपना अधूरा रहा, फिर चुना अपराध का रास्ता

पुलिस के अनुसार आर. यशोवर्धन ने कई वर्षों तक यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और दो बार परीक्षा भी दी, लेकिन दोनों प्रयासों में सफलता नहीं मिली। अधिकारी बनने की चाह और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करने की लालसा ने उसे अपराध की राह पर धकेल दिया। उसने खुद को आईपीएस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतना शुरू किया और इसी के जरिए ठगी के मामलों को अंजाम दिया।

फर्जी पहचान के लिए तैयार किया पूरा सिस्टम

पुलिस जांच में आरोपी के कब्जे से कई आपत्तिजनक और फर्जी सामग्री बरामद हुई है। इनमें—

  • 5 फर्जी पहचान पत्र (आईडी कार्ड)
  • 8 अलग-अलग पदों के फर्जी विजिटिंग कार्ड
  • पुलिस और सेना से जुड़े 25 प्रतीक चिन्ह (लोगो)
  • सेना और पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दियां
  • 3 फर्जी रिबन
  • 1 वायरलेस सेट

बरामद सामग्री से स्पष्ट हुआ कि आरोपी खुद को विभिन्न सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को भ्रमित करता था और सरकारी विभागों में प्रभाव होने का दावा करता था।

नौकरी, कंपनी रजिस्ट्रेशन और टेंडर दिलाने के नाम पर करता था ठगी

पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों को रक्षा मंत्रालय, पुलिस विभाग और अन्य सरकारी संस्थानों में नौकरी दिलाने, कंपनी का पंजीकरण कराने, सरकारी टेंडर पास कराने तथा अन्य प्रशासनिक कार्य करवाने का झांसा देता था। प्रभावशाली व्यक्तित्व, वर्दी और फर्जी दस्तावेजों के कारण लोग आसानी से उसकी बातों में आ जाते थे और लाखों रुपये उसके खाते में जमा कर देते थे।

पहला मामला: कंपनी पंजीकरण के नाम पर 15 लाख रुपये की ठगी

पहला मामला 8 जुलाई 2026 को सामने आया। डाकरा बाजार निवासी अंशुल उपाध्याय ने राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने स्वयं को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए उनकी दिवंगत माता के नाम पर कंपनी का पंजीकरण कराने का भरोसा दिलाया। इस बहाने आरोपी ने उनसे 15 लाख रुपये ले लिए, लेकिन कोई काम नहीं कराया।

दूसरा मामला: रक्षा मंत्रालय में नौकरी का झांसा देकर 4.60 लाख हड़पे

दूसरा मामला 15 जुलाई 2026 को दर्ज हुआ। कैनाल रोड निवासी डॉ. अनुपमा ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए फर्जी आईडी कार्ड और विजिटिंग कार्ड दिखाए। उसने रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का दावा किया और इस बहाने 4 लाख 60 हजार रुपये ठग लिए।

मसूरी रोड पर चेकिंग के दौरान दबोचा गया आरोपी

दोनों मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। 16 जुलाई 2026 को राजपुर थाना पुलिस ने मसूरी रोड स्थित सीएसआई तिराहे के पास वाहन चेकिंग के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं और पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने अन्य कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

एसपी सिटी ने किया बड़ा खुलासा

एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि आरोपी एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी का बेटा है। बचपन से वह अधिकारियों की कार्यशैली, शक्ति और सामाजिक सम्मान से प्रभावित था। यूपीएससी में लगातार असफल रहने के बाद उसने फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर लोगों को प्रभावित करना शुरू किया। वर्दी, फर्जी पहचान पत्र और सरकारी प्रतीकों का इस्तेमाल कर वह लोगों का भरोसा जीतता था और फिर नौकरी, टेंडर तथा अन्य सरकारी कार्य कराने के नाम पर मोटी रकम वसूल लेता था।

पुलिस कर रही है विस्तृत जांच

पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल फोन, दस्तावेजों और संपर्कों की गहन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। साथ ही, संभावित अन्य पीड़ितों से भी सामने आने की अपील की गई है।

निष्कर्ष

देहरादून में सामने आया यह मामला बताता है कि सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने वाले अपराधी कितनी सुनियोजित तरीके से लोगों का विश्वास जीतते हैं। फर्जी पहचान, वर्दी और प्रभावशाली दस्तावेजों के आधार पर लोगों को नौकरी और सरकारी काम दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की जा रही थी। पुलिस की कार्रवाई से इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन यह घटना लोगों के लिए भी सतर्क रहने का बड़ा संदेश है कि किसी भी सरकारी नियुक्ति या प्रशासनिक कार्य के नाम पर धनराशि देने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान और दावों की आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें।

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