स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 28 अप्रैल 2026
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को लेकर सियासत तेज हो गई है। धामी सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में बुलाए गए इस सत्र को कांग्रेस ने पूरी तरह से औचित्यहीन बताते हुए इसे ‘नौटंकी’ और जनता के पैसों की बर्बादी करार दिया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह विशेष सत्र किसी ठोस नीति या जनहित के मुद्दे के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक दिखावे और केंद्र सरकार को खुश करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
आलोक शर्मा ने सत्र के खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक दिन के इस सत्र पर लगभग 10 से 12 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस फिजूल खर्च का जिम्मेदार कौन है और सरकार जनता को इसका जवाब कब देगी।
कांग्रेस नेता ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह केंद्र में संसद का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, उसी राह पर अब उत्तराखंड सरकार भी चल रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग की संज्ञा दी।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी आलोक शर्मा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब तक 73वें और 74वें संविधान संशोधन जैसे प्रावधानों को पूरी तरह स्पष्ट और प्रभावी नहीं किया जाएगा, तब तक महिला आरक्षण जैसे बड़े फैसलों के क्रियान्वयन में बाधाएं आती रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा यदि इस दिशा में ईमानदारी से पहल करती है, तो कांग्रेस उससे चार कदम आगे बढ़कर सहयोग देने को तैयार है।
कांग्रेस की नीति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से महिलाओं को अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर रही है। साथ ही उन्होंने सांस्कृतिक और राजनीतिक संदर्भ देते हुए भाजपा पर कटाक्ष किया और कहा कि कांग्रेस जमीन पर संघर्ष करने वाली पार्टी है, जबकि भाजपा प्रतीकात्मक राजनीति में विश्वास रखती है।
इस दौरान उन्होंने अंकिता भंडारी मामले का भी जिक्र किया और कहा कि जब तक राज्य सरकार इस मामले में पीड़िता को पूर्ण न्याय नहीं दिला देती, तब तक महिला सशक्तिकरण की बात करना केवल दिखावा है। उन्होंने सरकार से पहले न्याय सुनिश्चित करने और फिर महिला अधिकारों की बात करने की नसीहत दी।
निष्कर्ष:
देहरादून में आयोजित विधानसभा का विशेष सत्र अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष इसे महज राजनीतिक प्रदर्शन और संसाधनों की बर्बादी करार दे रहा है। खर्च, मंशा और परिणामों को लेकर उठे सवालों ने इस सत्र की प्रासंगिकता पर बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गहराई से असर डाल सकता है।


