देहरादून/पौड़ी गढ़वाल | 8 जून 2026
उत्तराखंड में एक संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी बहन की मृत्यु के बाद उसके पति पर एचआईवी संक्रमण की जानकारी छिपाने, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराने और परिवार को गुमराह करने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर देहरादून के प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
पौड़ी गढ़वाल निवासी शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनकी बहन को 14 फरवरी 2026 को गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के चलते एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में जांच के दौरान महिला एचआईवी संक्रमित पाई गई। चिकित्सकों ने संक्रमण के संभावित स्रोत और स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के लिए महिला के पति और पुत्र की भी जांच कराने की सलाह दी थी।
आरोप है कि चिकित्सकों की सलाह के बावजूद महिला का पति अस्पताल से चला गया और उसने अपनी जांच नहीं कराई। परिजनों का कहना है कि बाद में उसने व्हाट्सएप के माध्यम से एक एचआईवी जांच रिपोर्ट भेजी, जिसे उसने ग्राफिक एरा अस्पताल, धूलकोट की रिपोर्ट बताया। हालांकि रिपोर्ट की सत्यता पर संदेह होने पर जब परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
शिकायत के अनुसार अस्पताल से मिली जानकारी में बताया गया कि रिपोर्ट में अंकित यूएचआईडी नंबर किसी अन्य महिला मरीज का था और संबंधित व्यक्ति के नाम से अस्पताल के रिकॉर्ड में कोई जांच दर्ज नहीं थी। इस खुलासे के बाद रिपोर्ट के फर्जी होने की आशंका और गहरा गई। परिजनों का आरोप है कि जानबूझकर भ्रामक दस्तावेज प्रस्तुत कर सच्चाई छिपाने का प्रयास किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में चिकित्सकों द्वारा इन्द्रेश अस्पताल में दोबारा जांच कराने की सलाह दी गई थी, लेकिन महिला के पति ने वहां भी अपनी जांच कराने से इनकार कर दिया। इस दौरान महिला का उपचार जारी रहा, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका और 2 मार्च 2026 को उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि पति ने अपनी बीमारी की वास्तविक स्थिति को छिपाया, फर्जी रिपोर्ट के माध्यम से जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया और समय रहते सही जानकारी सामने नहीं आने दी। उनका यह भी कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से मृतका की सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रेमनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच अधिकारी विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं, जिसमें मेडिकल दस्तावेजों की सत्यता, जांच रिपोर्टों का रिकॉर्ड, अस्पतालों से प्राप्त जानकारी तथा संबंधित व्यक्तियों के बयान शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में सभी दस्तावेजों और आरोपों का सत्यापन किया जा रहा है ताकि पूरे प्रकरण की वास्तविकता सामने लाई जा सके।
निष्कर्ष
पौड़ी गढ़वाल और देहरादून से जुड़े इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और बीमारी छिपाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल कानूनी बल्कि नैतिक दृष्टि से भी गंभीर अपराध माना जाएगा। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी पक्षों के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले की सच्चाई अब जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।


