प्रकाशन तिथि: 12 जून 2026
स्थान: ऋषिकेश/देहरादून, उत्तराखंड
ऋषिकेश। उत्तराखंड के ऋषिकेश में पिछले महीने हुए उज्जैनी एक्सप्रेस रेल हादसे में रेलवे प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे की प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद ऑपरेटिंग, सीएनडब्ल्यू (कोच एंड वैगन) और लोको विभाग से जुड़े कुल आठ कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी कर दी गई है। वहीं, मामले में जिम्मेदारी तय होने के बाद संबंधित लोको पायलट को उसके पद से हटाकर चंदौसी भेज दिया गया है, जहां उसे दोबारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी जारी है और इसी महीने शेष कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
18 मई को हुआ था बड़ा रेल हादसा
गौरतलब है कि 18 मई 2026 को ऋषिकेश के खांड गांव के पास शंटिंग के दौरान उज्जैनी एक्सप्रेस के तीन कोच और इंजन पटरी से उतर गए थे। हादसे में कोच और इंजन को काफी नुकसान पहुंचा था और कई डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
हालांकि राहत की बात यह रही कि उस समय ट्रेन में कोई यात्री सवार नहीं था। ट्रेन को यार्ड में शंटिंग प्रक्रिया के लिए खड़ा किया गया था, जिसके दौरान यह दुर्घटना हुई। घटना के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया था और दिल्ली व मुरादाबाद मंडल के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गए थे।
प्रारंभिक जांच में लापरवाही के संकेत
रेलवे की प्रारंभिक जांच में हादसे के पीछे मानवीय चूक और सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, लोको पायलट की गैरमौजूदगी में ट्रेन के चेन और गुटके (सुरक्षा अवरोधक) हटाए गए, जिसके कारण ट्रेन अनियंत्रित होकर आगे बढ़ गई और दुर्घटना का शिकार हो गई।
मामले में ऑपरेटिंग, सीएनडब्ल्यू और लोको अनुभाग के आठ कर्मचारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संबंधित लोको पायलट को तत्काल प्रभाव से हटाकर चंदौसी स्थानांतरित किया गया है, जहां उसे पुनः प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आरोपी कर्मचारियों को दिया गया एक महीने का समय
रेलवे प्रशासन ने सभी आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी कर उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया है। विभाग की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित कर्मचारी एक महीने के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण और बचाव पक्ष का बयान प्रस्तुत करें।
अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों के जवाब और विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
देहरादून रेल हादसे में भी हुई कार्रवाई
रेलवे प्रशासन ने हाल के वर्षों में हुई अन्य घटनाओं में भी जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में फरवरी 2023 में देहरादून टर्मिनल पर नंदा देवी एक्सप्रेस के चार पहिए पटरी से उतरने के मामले में भी लंबी विभागीय जांच के बाद कार्रवाई की गई है।
जांच में शंटिंग मास्टर की लापरवाही सामने आने पर रेलवे ने उसकी एक वर्ष की वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) रोकने का निर्णय लिया है। आरोप था कि शंटिंग के दौरान शंटिंग मास्टर ने लोको पायलट को सही और समय पर सूचना नहीं दी, जिसके कारण ट्रेन समय रहते नहीं रुक सकी और पीछे बनी दीवार से टकरा गई थी।
रेलवे अधिकारियों ने क्या कहा
मुरादाबाद मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक महेश यादव ने बताया कि ऋषिकेश में उज्जैनी एक्सप्रेस के इंजन और तीन कोचों के पटरी से उतरने के मामले में प्रारंभिक जांच के आधार पर लोको पायलट को हटाया जा चुका है। साथ ही सभी आठ आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि मामले के प्रत्येक पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रेल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
ऋषिकेश रेल हादसे ने रेलवे यार्डों में शंटिंग प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए शंटिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन और कर्मचारियों की नियमित मॉनिटरिंग आवश्यक है।
रेलवे प्रशासन भी इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने तथा कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने की दिशा में कदम उठा रहा है।
निष्कर्ष
ऋषिकेश में उज्जैनी एक्सप्रेस हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त रुख अपनाया है। आठ कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट और लोको पायलट को हटाने जैसी कार्रवाई यह संकेत देती है कि सुरक्षा मानकों में लापरवाही को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी विभागीय कदम उठाए जा सकते हैं। ऐसे में यह कार्रवाई भविष्य में रेल संचालन और शंटिंग प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


