देहरादून | 7 जुलाई 2026
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते यातायात दबाव और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दो बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। एक ओर देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद डाटकाली से गणेशपुर तक की पुरानी सड़क को वन विभाग को वापस सौंप दिया गया है, वहीं दूसरी ओर देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर सात नए फ्लाईओवर, लंबी सर्विस लेन और फुट ओवरब्रिज के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इन परियोजनाओं से आने वाले वर्षों में देहरादून और आसपास के क्षेत्रों की यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।\
एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद बंद हुई पुरानी सड़क
देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के संचालन के साथ ही डाटकाली से गणेशपुर तक लगभग 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर पूरी तरह चालू हो गया है। इसके बाद इस मार्ग की पुरानी सड़क पर सामान्य वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है।
अब केवल मोहंड गांव तक ही वाहनों को प्रवेश की अनुमति रहेगी, जबकि उसके आगे का पूरा क्षेत्र वन विभाग के नियंत्रण में रहेगा। एनएचएआई ने इस सड़क का औपचारिक हस्तांतरण वन विभाग को कर दिया है और पुलिस प्रशासन को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि सभी वाहनों को नए एलिवेटेड कॉरिडोर की ओर डायवर्ट किया जा सके।
वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया कॉरिडोर
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार डाटकाली से गणेशपुर तक बनाया गया एलिवेटेड कॉरिडोर केवल यातायात सुविधा के लिए नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन किया गया है।
यह कॉरिडोर बरसाती नदी के ऊपर विकसित किया गया है, जिससे जंगल के प्राकृतिक मार्ग प्रभावित नहीं होंगे और वन्यजीवों का आवागमन सुरक्षित बना रहेगा। पुरानी सड़क पर मानवीय गतिविधियां कम होने से वन क्षेत्र में हस्तक्षेप घटेगा और जैव विविधता संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा अभियान
देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक और सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए एनएचएआई ने व्यापक सड़क सुरक्षा योजना लागू कर दी है।
वर्ष 2020 में इस मार्ग को दो लेन से चार लेन में बदला गया था, लेकिन वाहनों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण कई स्थानों पर जाम और दुर्घटनाएं आम समस्या बन गई थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब हाईवे पर आधुनिक यातायात प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है।
सात फ्लाईओवर और 44 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन बनेगी
नई परियोजना के तहत जाखन पुल, जीवनगढ़, मियांवाला, छिद्दरवाला और रायवाला सहित प्रमुख स्थानों पर कुल सात फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इनमें जीवनगढ़ और रायवाला में दो-दो फ्लाईओवर प्रस्तावित किए गए हैं।
परियोजना का सबसे बड़ा निर्माण मियांवाला से नकरौंदा के बीच लगभग 2.25 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड फ्लाईओवर होगा। इसके अलावा हाईवे के दोनों ओर लगभग 44 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन विकसित की जाएगी, जिससे स्थानीय और लंबी दूरी के यातायात को अलग-अलग संचालित किया जा सके।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दो आधुनिक फुट ओवरब्रिज भी बनाए जाएंगे। इनके निर्माण स्थल का अंतिम चयन तकनीकी सर्वे के बाद किया जाएगा।
ढाई वर्षों में पूरा होगा निर्माण कार्य
एनएचएआई ने इस पूरी सड़क सुरक्षा परियोजना को अगले लगभग ढाई वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि यातायात पर न्यूनतम प्रभाव पड़े और आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।
यात्रियों को मिलेगा तेज, सुरक्षित और जाम मुक्त सफर
परियोजना पूरी होने के बाद देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर यातायात और अधिक तेज एवं व्यवस्थित होगा। वहीं देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर फ्लाईओवर, सर्विस लेन और फुट ओवरब्रिज बनने से ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
स्थानीय यातायात और हाईवे ट्रैफिक अलग-अलग संचालित होने से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी तथा यात्रियों को अधिक सुरक्षित और सुगम सफर का अनुभव मिलेगा।
परिवहन और पर्यावरण दोनों को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार और एनएचएआई का मानना है कि ये दोनों परियोजनाएं आधुनिक सड़क अवसंरचना और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी। जहां एक ओर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक और सुरक्षित बनेगी, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को भी बेहतर संरक्षण मिलेगा।
निष्कर्ष
देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के पूर्ण संचालन और देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग के उन्नयन के साथ उत्तराखंड की सड़क व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। सात नए फ्लाईओवर, लंबी सर्विस लेन, फुट ओवरब्रिज और वन्यजीव संरक्षण आधारित एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं न केवल यातायात को अधिक सुरक्षित और तेज बनाएंगी, बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगी। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का लाभ लाखों यात्रियों, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण—तीनों को समान रूप से मिलने की उम्मीद है।




