चमोली | 7 जुलाई 2026
विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर होता जा रहा है। मामले को लेकर बदरीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला मंगलवार को मंदिर परिसर में अपने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठ गए। विधायक ने चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।
उधर, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) और जांच एजेंसियों ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मंदिर में पिछले 40 दिनों की सीसीटीवी फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कथित हेराफेरी की घटना पहली बार हुई या पहले भी इस तरह की अनियमितताएं होती रही हैं।
मंदिर परिसर में शुरू हुआ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
कांग्रेस ने सोमवार को ही इस मामले में आंदोलन का ऐलान किया था। इसके तहत मंगलवार को विधायक लखपत बुटोला अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बदरीनाथ मंदिर परिसर पहुंचे और शांतिपूर्ण उपवास शुरू किया।
विधायक ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान और चढ़ावे में किसी भी प्रकार की अनियमितता अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
40 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग खंगाल रही जांच टीम
जांच एजेंसियां अब केवल दो जुलाई को सामने आए मामले तक सीमित नहीं हैं। पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए मंदिर परिसर में उपलब्ध पिछले 40 दिनों की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी गई है।
जांच अधिकारी प्रत्येक रिकॉर्डिंग का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चढ़ावे की गणना के दौरान पहले भी किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी कर्मचारी अकेले कार्य कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी शामिल थे।
चढ़ावे की गणना में शामिल थी विशेष टीम
बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की गणना बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा गठित टीम की निगरानी में की जाती है। इस वर्ष गठित टीम में संबंधित आरोपी अधिकारी भी शामिल था।
इसी वजह से जांच एजेंसियां पूरी गणना प्रक्रिया, ड्यूटी आवंटन और उस दौरान मौजूद सभी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
बीकेटीसी ने कहा—हर पहलू की होगी निष्पक्ष जांच
बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि चढ़ावे की गणना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की 40 दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सभी फुटेज का परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी अन्य दिन भी किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी अधिकारी की नियुक्ति और जिम्मेदारियां भी जांच के दायरे में
मामले में आरोपी अधिकारी की नियुक्ति और उसे सौंपी गई जिम्मेदारियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2003 में उसे इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिली थी। वर्ष 2012 में शासन द्वारा स्वीकृत पदों में यह पद शामिल किया गया और वर्ष 2014 में उसे स्थायी नियुक्ति मिल गई। बाद में वर्ष 2017 में उसे बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
वर्ष 2026 में पहली बार उसकी तैनाती बदरीनाथ धाम में की गई, जहां उसे चढ़ावे की गणना और प्रोटोकॉल नोडल अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसी पहली तैनाती के दौरान उस पर चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप लगे हैं।
सेवानिवृत्त अधिकारियों की जगह नई नियुक्ति नहीं होने पर भी सवाल
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि चढ़ावे की गणना के लिए गठित छह सदस्यीय टीम के प्रभारी अधिकारी और उप-नोडल अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे।
इसके बावजूद उनकी जगह किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। ऐसे में दो जुलाई को हुई गणना के दौरान संबंधित आरोपी अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसियां इस प्रशासनिक चूक की भी समीक्षा कर रही हैं।
तय प्रक्रिया के तहत होती है दान और चढ़ावे की गणना
मंदिर प्रशासन के अनुसार चढ़ावे की गणना एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है। सबसे पहले सोना और चांदी अलग किए जाते हैं, उसके बाद नकदी की गिनती होती है।
यदि बहुमूल्य धातुओं की मात्रा अधिक होती है तो उनकी जांच के लिए विशेषज्ञ सोनार को बुलाया जाता है। नकदी को खजांची की उपस्थिति में बैंक अधिकारियों को सौंपा जाता है तथा उसकी विधिवत रसीद प्राप्त की जाती है। सोना और चांदी अलग-अलग पोटलियों में सुरक्षित रखे जाते हैं, जिन पर तारीख और सामग्री का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है।
32 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बनी जांच का मुख्य आधार
पूरे मामले में सबसे अहम साक्ष्य सीसीटीवी फुटेज को माना जा रहा है। मंदिर परिसर में हाल ही में हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए गए थे और उनके सक्रिय होने के अगले ही दिन कथित हेराफेरी का मामला सामने आया।
मंदिर परिसर में कुल 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। प्रारंभिक जांच में एक कैमरे की रिकॉर्डिंग में संबंधित कर्मचारी मोबाइल फोन के साथ कुछ संदिग्ध वस्तु लेते हुए दिखाई देने की बात सामने आई है। जांच टीम पुराने और नए दोनों कैमरों की रिकॉर्डिंग का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
निष्कर्ष
बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला अब केवल एक प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। एक ओर कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर उपवास पर बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां 40 दिनों की सीसीटीवी फुटेज और पूरे रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित अनियमितता एक अकेली घटना थी या इसके पीछे कोई संगठित तंत्र सक्रिय था।


