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बदरीनाथ चढ़ावा विवाद पर गरमाई सियासत, कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने सरकार पर उठाए सवाल, प्रेस वार्ता में हुए भावुक

हाईकोर्ट के तीन वर्तमान न्यायाधीशों की समिति से जांच की मांग, कहा- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला

दिनांक: 8 जुलाई 2026
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड

देहरादून: बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। बुधवार को कांग्रेस विधायक और बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि लखपत बुटोला ने देहरादून स्थित कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राज्य सरकार और बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताया।

प्रेस वार्ता के दौरान भावुक हुए विधायक

मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक लखपत बुटोला भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह ऐसे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां भगवान विष्णु का पवित्र धाम बदरीनाथ स्थित है और जहां विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब भी मौजूद है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों से न केवल स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि देश-विदेश में बसे करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में भी चिंता और दुख पैदा हुआ है।

हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

कांग्रेस विधायक ने इस पूरे प्रकरण की जांच किसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय न्यायिक स्तर पर कराने की मांग उठाई। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले की पारदर्शी जांच के लिए हाईकोर्ट के तीन वर्तमान न्यायाधीशों की एक विशेष समिति गठित की जाए, जो पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर सके।

बुटोला का कहना है कि चढ़ावे के संग्रह, रखरखाव और लेखा-जोखा की प्रक्रिया में यदि कहीं भी अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रह सके।

केवल निलंबन को पर्याप्त कार्रवाई मानने से किया इनकार

विधायक ने कहा कि मामले में एक कर्मचारी या व्यक्तिगत सहायक के निलंबन को अंतिम कार्रवाई मान लेना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि यदि आरोप गंभीर हैं तो जिम्मेदारी तय करने के लिए पूरी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी एक कर्मचारी पर कार्रवाई करके पूरे मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता। आवश्यक है कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट हो कि कथित अनियमितता कैसे हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं।

सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल

लखपत बुटोला ने राज्य सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि बदरी-केदार मंदिर समिति के गठन और संचालन में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या चढ़ावे से जुड़ी गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना भी आवश्यक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को पूरे मामले में स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए और जांच प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना सत्य सामने लाने का प्रयास करना चाहिए।

आस्था से जुड़ा है संवेदनशील मामला

विधायक ने कहा कि चारधाम यात्रा और विशेष रूप से बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का प्रभाव केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सीधे धार्मिक भावनाओं और विश्वास से जुड़ जाता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है, ताकि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनी रहे।

सरकार और मंदिर समिति की प्रतिक्रिया पर नजर

विधायक के आरोपों और मांगों के बाद अब राजनीतिक और धार्मिक हलकों की नजर राज्य सरकार तथा बदरी-केदार मंदिर समिति की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

निष्कर्ष

बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी का मामला अब प्रशासनिक जांच से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बनता जा रहा है। कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने पारदर्शिता बनाए रखने और जनता के विश्वास को कायम रखने की चुनौती है। आने वाले समय में जांच की दिशा और उससे निकलने वाले निष्कर्ष इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेंगे।

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