अपहरण की कहानी निकली झूठी, आर्थिक तंगी में बेटी को बेचने का आरोप; मुजफ्फरनगर से सकुशल बरामद हुई 15 वर्षीय किशोरी
स्थान: देहरादून
तारीख: 03 अगस्त 2026
देहरादून में पांच जुलाई को दर्ज हुए 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के कथित अपहरण मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। शुरुआती जांच में जिस मामले को अपहरण माना जा रहा था, वह जांच के दौरान मानव तस्करी और नाबालिग की खरीद-फरोख्त का मामला बनकर सामने आया। पुलिस के अनुसार, जिस महिला ने अपनी बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, उसी पर आर्थिक तंगी के चलते अपनी नाबालिग बेटी का डेढ़ लाख रुपये में सौदा करने का आरोप है।
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने पीड़िता की मां सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही किशोरी को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से सकुशल बरामद कर लिया गया है।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी व्यापक जांच
राजपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने पांच जुलाई को पुलिस को सूचना दी थी कि उसकी 15 वर्षीय बेटी का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की और किशोरी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मैनुअल पुलिसिंग का सहारा लिया। लगातार की गई पड़ताल में पुलिस को किशोरी के उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में होने की जानकारी मिली।
मुजफ्फरनगर से सकुशल बरामद हुई नाबालिग
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मुजफ्फरनगर में दबिश देकर दो आरोपियों मनीष और लवी कुमार को गिरफ्तार किया तथा उनके कब्जे से नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया।
पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी लवी कुमार ने बताया कि उसने पिंकी मलिक के माध्यम से नाबालिग को उसकी मां से डेढ़ लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद उसने विवाह कराने के उद्देश्य से किशोरी को दो लाख रुपये में मनीष को बेच दिया।
मां ने खुद रची थी अपहरण की कहानी
पुलिस के मुताबिक, इस खुलासे के बाद मुजफ्फरनगर से पिंकी मलिक और देहरादून से पीड़िता की मां को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ के दौरान पीड़िता की मां ने स्वीकार किया कि उसकी मुलाकात पिंकी मलिक से एक समारोह में हुई थी। आर्थिक तंगी के कारण उसने अपनी बेटी को बेचने का सौदा डेढ़ लाख रुपये में किया था।
पुलिस के अनुसार, सौदे की कुल रकम में उसे केवल 80 हजार रुपये मिले थे, जबकि बाकी रकम बाद में देने का आश्वासन दिया गया था। जब शेष भुगतान नहीं हुआ और मामला उजागर होने की आशंका बढ़ी, तब उसने बेटी के अपहरण की झूठी कहानी बनाकर पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी, ताकि खुद पर किसी प्रकार का संदेह न आए।
आरोपियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा
थाना राजपुर प्रभारी पीडी भट्ट ने बताया कि मामले में जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64, 65(1), 87, 143 और 3(5) के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 तथा 16/17 भी जोड़ी गई हैं।
पुलिस ने इस मामले में मनीष निवासी जानसठ (मुजफ्फरनगर), लवी कुमार निवासी फलावदा (मेरठ), पिंकी मलिक निवासी नई मंडी (मुजफ्फरनगर) तथा पीड़िता की मां निवासी देहरादून को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मानव तस्करी के एंगल से भी हो रही जांच
पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि गिरफ्तार आरोपी पहले भी नाबालिगों की खरीद-फरोख्त या मानव तस्करी जैसे मामलों में शामिल रहे हैं या नहीं। जांच एजेंसियां आरोपियों के आपसी संबंधों, लेन-देन और संभावित गिरोह की गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं।
निष्कर्ष
देहरादून का यह मामला केवल कथित अपहरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच में नाबालिग की खरीद-फरोख्त और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर कानून के दायरे में लाया जाएगा। वहीं, नाबालिग के सकुशल बरामद होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन इस घटना ने समाज में बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी जैसे अपराधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


