देहरादून | 15 अगस्त 2026
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चल रहे SIR के दूसरे चरण की प्रक्रिया 13 अगस्त को पूरी हो गई। इस दौरान 14 जुलाई से 13 अगस्त के बीच प्रदेशभर से कुल 2,83,890 दावे और आपत्तियां विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हुई हैं। अब 14 अगस्त से SIR का तीसरा चरण शुरू हो चुका है, जिसमें प्राप्त दावों और आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा।
फॉर्म-6, 7 और 8 के जरिए आए आवेदन
निर्वाचन विभाग के अनुसार, दूसरे चरण के दौरान प्राप्त कुल दावे और आपत्तियों में फॉर्म-6 के करीब 1.28 लाख आवेदन शामिल हैं। इसके अलावा फॉर्म-7 के माध्यम से लगभग 1.07 लाख और फॉर्म-8 के जरिए करीब 47 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं।
इन आवेदनों की जांच और डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया अब आगे बढ़ाई जा रही है। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य दावों और आपत्तियों का निर्धारित नियमों के अनुसार परीक्षण कर मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।
1.07 लाख मतदाताओं के नाम पर दर्ज हुई आपत्तियां
SIR के दूसरे चरण में करीब 1.07 लाख मतदाताओं के नाम को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें मुख्य रूप से यह दावा किया गया है कि संबंधित मतदाता अब उस पते पर निवास नहीं करते हैं या उस स्थान से कहीं और जा चुके हैं।
अब तीसरे चरण में इन मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही जिन लोगों ने संबंधित मतदाताओं के नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है, उन्हें भी नोटिस देकर सुनवाई की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
नोटिस मिलने पर मतदाता को देना होगा जवाब
निर्वाचन विभाग के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज की गई है, उन्हें ERO या AERO स्तर से नोटिस जारी किया जाएगा। यदि किसी मतदाता को BLO के माध्यम से फॉर्म-10 का नोटिस मिलता है तो उसे नोटिस में दर्ज कारणों के आधार पर अपने नाम को मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
वहीं, आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को भी सुनवाई के दौरान अपने आरोप या आपत्ति के समर्थन में प्रमाण उपलब्ध कराने होंगे। इसके बाद संबंधित निर्वाचन अधिकारी नियमों के तहत मामले का निस्तारण करेंगे।
राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठक
SIR का तीसरा चरण शुरू होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया तथा निर्वाचन नियमों से जुड़े विभिन्न प्रावधानों की जानकारी राजनीतिक दलों को दी गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रतिनिधियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 और मैनुअल ऑफ इलेक्टोरल रोल में दिए गए प्रावधानों के बारे में बिंदुवार जानकारी दी।
BLA की सक्रिय भागीदारी पर जोर
बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों से अपने बूथ लेवल एजेंट यानी BLA की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
निर्वाचन विभाग की ओर से राजनीतिक दलों को यह भी बताया गया कि वर्तमान में फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 को डिजिटाइज करने की प्रक्रिया चल रही है।
दावों और आपत्तियों की जांच के बाद होगा निस्तारण
SIR के तीसरे चरण में अब निर्वाचन विभाग प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों की जांच करेगा। जहां किसी मतदाता के नाम को लेकर आपत्ति दर्ज है, वहां संबंधित पक्षों को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। दस्तावेज और प्रमाण देखने के बाद ही नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को नियमानुसार हटाने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है।
मतदाताओं के लिए जरूरी है नोटिस का जवाब देना
निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, किसी मतदाता को यदि SIR के तहत नोटिस प्राप्त होता है तो उसे इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नोटिस में दिए गए कारणों को समझकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO या AERO के समक्ष आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
समय पर जवाब और दस्तावेज उपलब्ध कराना मतदाता सूची में नाम को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में SIR का दूसरा चरण पूरा होने के बाद अब तीसरे चरण में दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 2,83,890 दावों और आपत्तियों के प्राप्त होने के बाद निर्वाचन विभाग के सामने बड़ी संख्या में आवेदनों की जांच की जिम्मेदारी है। खास तौर पर 1.07 लाख मतदाताओं के नाम पर दर्ज आपत्तियों पर नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। अब संबंधित मतदाताओं और आपत्तिकर्ताओं को अपने दावों के समर्थन में आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे, जिसके आधार पर निर्वाचन अधिकारी आगे का निर्णय लेंगे।


