स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 21 अगस्त 2026
मतदाता सूची के दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पर सीधी निगरानी
उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया अब प्रशासनिक अधिकारियों की सीधी निगरानी में होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड ने प्रक्रिया की मॉनिटरिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नौ IAS और PCS अधिकारियों को पर्यवेक्षण अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है।
इन अधिकारियों की तैनाती खास तौर पर हरिद्वार, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिलों में की गई है। उन्हें संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में दावे और आपत्तियों के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हरिद्वार में चार अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार हरिद्वार जिले में चार अधिकारियों को पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया है। इनमें डॉ. संदीप तिवारी, ललित नारायण मिश्र, नन्द कुमार और गोपाल राम बिनवाल शामिल हैं।
इन अधिकारियों को अपने-अपने निर्धारित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी।
नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में भी तैनाती
नैनीताल जिले में संजय कुमार और विनीत तोमर को पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया गया है। वहीं ऊधम सिंह नगर जिले में प्रकाश चन्द्र दुम्का, जय किशन और दिवेश शाशनी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस तरह तीनों जिलों में कुल नौ प्रशासनिक अधिकारियों को SIR की प्रक्रिया की निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
नोटिस से लेकर सुनवाई तक होगी निगरानी
नामित पर्यवेक्षण अधिकारियों को केवल दावे और आपत्तियों की संख्या पर नजर नहीं रखनी होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया की बारीकी से मॉनिटरिंग करनी होगी। इसमें मतदाताओं को नोटिस जारी करने, नोटिस की तामीली कराने और संबंधित मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया शामिल है।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हो। साथ ही दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण निष्पक्ष, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए।
सप्ताह में दो बार देनी होगी निरीक्षण रिपोर्ट
आदेश में पर्यवेक्षण अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। उन्हें अपने दैनिक निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट तैयार करनी होगी और यह आख्या संबंधित मंडलायुक्त के माध्यम से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को सप्ताह में दो बार भेजनी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य SIR की प्रक्रिया के दौरान होने वाले दावे और आपत्तियों के निस्तारण की नियमित समीक्षा करना तथा किसी भी स्तर पर सामने आने वाली समस्या का समय रहते समाधान सुनिश्चित करना है।
पुनरीक्षण अवधि तक आयोग के नियंत्रण में रहेंगे अधिकारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आदेश के अनुसार निर्धारित पुनरीक्षण अवधि तक नामित सभी अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अधीन रहेंगे।
इसका मतलब है कि SIR से संबंधित जिम्मेदारी निभाने के दौरान अधिकारियों को आयोग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
मतदाता सूची की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर
SIR के दौरान दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मतदाता सूची में किसी योग्य मतदाता का नाम छूट न जाए और अपात्र नामों को लेकर प्राप्त आपत्तियों का नियमों के अनुसार परीक्षण हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।
नौ IAS और PCS अधिकारियों की तैनाती के बाद संबंधित जिलों में SIR की प्रक्रिया की निगरानी और अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जाने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में SIR के तहत मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियों के निस्तारण को अब नौ IAS और PCS अधिकारियों की सीधी निगरानी में आगे बढ़ाया जाएगा। हरिद्वार, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में तैनात किए गए पर्यवेक्षण अधिकारी नोटिस, तामीली, सुनवाई और निस्तारण की प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करेंगे। दैनिक निरीक्षण की रिपोर्ट सप्ताह में दो बार मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तक पहुंचाई जाएगी। यह व्यवस्था मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, नियमों के पालन और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


