देहरादून, 11 सितंबर 2026
उत्तराखंड में निजी वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। निजी कार, बाइक या अन्य वाहनों से सवारी ढोने के साथ-साथ खाना, किराना और दूसरे सामान की डिलीवरी करने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। देहरादून संभागीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक में इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्णय लिया गया है।
रैपिडो, स्विगी और जोमैटो से जुड़े वाहन भी जांच के दायरे में
देहरादून समेत प्रदेश के कई हिस्सों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ लोग निजी वाहनों से यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इन्हीं वाहनों से खाने-पीने की वस्तुओं, किराने और अन्य सामान की डिलीवरी कर रहे हैं।
परिवहन विभाग की जांच में यदि कोई निजी वाहन सवारी ढोते या व्यावसायिक पार्सल पहुंचाते मिला तो उसके खिलाफ चालान की कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में वाहन को सीज करने के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
निजी वाहन को कमर्शियल कराना जरूरी
परिवहन विभाग का कहना है कि निजी श्रेणी में पंजीकृत वाहन व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए होते हैं। इनका इस्तेमाल किराये पर यात्रियों को ढोने या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता।
व्यावसायिक गतिविधियों के लिए वाहन का परिवहन श्रेणी में पंजीकरण, वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेज होना आवश्यक है। विभाग का तर्क है कि नियमों का पालन कराने से न केवल सड़क सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों और वाहन चालकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
इसके अलावा निजी वाहनों से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने से वैध परमिट लेकर काम करने वाले कमर्शियल वाहन संचालकों को भी प्रतिस्पर्धा में नुकसान होता है।
देहरादून से लेकर ऋषिकेश और विकासनगर तक होगी चेकिंग
परिवहन विभाग ने देहरादून के साथ ऋषिकेश, विकासनगर, सहसपुर और आसपास के इलाकों में भी विशेष जांच अभियान चलाने का फैसला किया है। विभागीय टीमें बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, प्रमुख सार्वजनिक स्थानों और उन क्षेत्रों में निगरानी रखेंगी, जहां ऑनलाइन माध्यम से सवारी या सामान की बुकिंग अधिक होती है।
ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़े वाहन चालकों और वाहन मालिकों को भी नियमों का पालन करने की चेतावनी दी गई है। विभाग की ओर से संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
पहले सवारी ढोने वाले निजी वाहनों पर कार्रवाई, अब डिलीवरी वाहन भी निशाने पर
उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी के मुताबिक विभाग ने पहले निजी वाहनों से सवारी ढोने वालों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। अब पार्सल और फूड डिलीवरी में लगे निजी वाहनों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है।
उनका कहना है कि जिन लोगों को अपने वाहन से व्यावसायिक काम करना है, उन्हें वाहन को नियमानुसार कमर्शियल श्रेणी में पंजीकृत कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर वाहन सीज किया जा सकता है और सीज होने के बाद उसे छुड़ाने की प्रक्रिया भी आसान नहीं होगी।
ऐप के जरिए बुक कर पकड़ रही परिवहन विभाग की टीम
परिवहन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डिलीवरी या सवारी के लिए इस्तेमाल हो रहे निजी वाहनों को मौके पर पकड़ना आसान नहीं होता। इसके लिए विभागीय अधिकारी संबंधित ऑनलाइन ऐप के माध्यम से वाहन बुक कर रहे हैं।
बुकिंग के बाद जब संबंधित वाहन चालक मौके पर पहुंचता है तो विभागीय टीम कार्रवाई करती है। विभाग के अनुसार, इस तरीके से देहरादून में अब तक 100 से अधिक दोपहिया वाहनों को सीज किया जा चुका है।
इसके अलावा ऐप संचालित करने वाली कंपनियों को नोटिस देने के साथ ही उनके कार्यालयों में भी कार्रवाई की गई है।
निजी वाहन से सवारी ढोना सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम भरा
उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी का कहना है कि निजी वाहन से सवारी ढोना सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर मामला है। ऐसे वाहनों के दुर्घटना में शामिल होने पर बीमा क्लेम को लेकर भी परेशानी सामने आ सकती है। इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा और आपराधिक घटनाओं का जोखिम भी बना रहता है।
विभाग का कहना है कि इसी वजह से निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने के लिए अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है।
डिलीवरी बॉय बोले- कमाई कम, टैक्स और खर्च ज्यादा
परिवहन विभाग की कार्रवाई से डिलीवरी का काम करने वाले युवाओं और वाहन मालिकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि पहले ही ऑनलाइन डिलीवरी के काम से आमदनी सीमित हो गई है। ऐसे में वाहन को कमर्शियल श्रेणी में बदलने के बाद टैक्स, परमिट और अन्य खर्च बढ़ने से काम करना मुश्किल हो जाएगा।
डिलीवरी बॉय राजकुमार गुप्ता ने कहा कि सामान पहुंचाकर जितनी कमाई होती है, उससे ज्यादा रकम कमर्शियल वाहन से जुड़े टैक्स और खर्च में चली जाएगी। उनका कहना है कि मौजूदा समय में कमाई पहले की तुलना में कम हो गई है और परिवार के खर्च भी चलाने हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कमर्शियल वाहन से दूसरे राज्यों में जाने पर वहां के नियमों के मुताबिक अतिरिक्त टैक्स का बोझ भी पड़ सकता है।
वाहन कमर्शियल कराने पर निजी इस्तेमाल की भी चिंता
मुजफ्फरनगर निवासी डिलीवरी बॉय मोहम्मद शादिक ने बताया कि निजी वाहन को कमर्शियल श्रेणी में बदलने से आर्थिक दबाव काफी बढ़ जाएगा। उनके मुताबिक पहले ही डिलीवरी के काम से होने वाली आय कम हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि जिस वाहन से वह डिलीवरी करते हैं, उसी का इस्तेमाल परिवार के साथ घर आने-जाने के लिए भी करते हैं। ऐसे में वाहन को कमर्शियल कराने के बाद निजी इस्तेमाल और अतिरिक्त खर्च से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष
परिवहन विभाग की सख्ती से जहां निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर अंकुश लगाने की तैयारी है, वहीं डिलीवरी से जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी और बढ़ते खर्च की चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग स्पष्ट कर चुका है कि व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल नियमों के मुताबिक नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में देहरादून समेत ऋषिकेश, विकासनगर, सहसपुर और अन्य क्षेत्रों में चेकिंग बढ़ने के साथ डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़े वाहन चालकों पर कार्रवाई तेज होने की संभावना है।


