देहरादून | 10 सितंबर 2026
उत्तराखंड परिवहन निगम में 200 नई बसों की खरीद को लेकर शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया अचानक सवालों के घेरे में आ गई है। करीब डेढ़ महीने तक चली निविदा प्रक्रिया में दो बड़ी वाहन निर्माता कंपनियों ने बोली लगाई। पांच सितंबर को बोली दाखिल करने की अंतिम तारीख खत्म हुई और अगले ही दिन यानी छह सितंबर को निगम ने टेंडर निरस्त कर दिया।
टेंडर रद्द होने की इस टाइमिंग को लेकर निगम के भीतर चर्चाएं तेज हैं। प्रबंधन की ओर से इसे तकनीकी कारणों से लिया गया निर्णय बताया जा रहा है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक घटनाक्रम एक कंपनी की ओर से भेजे गए पत्र के बाद बदला और उच्च स्तर से मिले निर्देशों के बाद टेंडर निरस्त करने का फैसला हुआ।
15 जुलाई को जारी हुई थी निविदा
उत्तराखंड परिवहन निगम ने 200 नई बसों की खरीद के लिए 15 जुलाई को निविदा जारी की थी। करीब डेढ़ महीने चली प्रक्रिया के बाद पांच सितंबर को बोली दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हुई।
सरकार के जेम पोर्टल के माध्यम से टाटा और अशोक लेलैंड ने टेंडर में अपनी बोली जमा की थी। बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामान्य तौर पर अगला चरण तकनीकी परीक्षण और दस्तावेजों की जांच का होना था, लेकिन इसके बजाय अगले ही दिन टेंडर रद्द कर दिया गया।
बोली खत्म होने के अगले दिन ही निरस्तीकरण
टेंडर निरस्त किए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी टाइमिंग को लेकर है। पांच सितंबर को कंपनियों ने बोली जमा की और छह सितंबर को निविदा निरस्त कर दी गई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि निविदा की शर्तों या प्रक्रिया में कोई तकनीकी खामी थी तो करीब डेढ़ महीने तक चली प्रक्रिया के दौरान उसे पहले क्यों नहीं चिन्हित किया गया। बोली जमा होने के बाद ही ऐसी स्थिति क्यों बनी कि पूरी निविदा प्रक्रिया को समाप्त करना पड़ा।
एक कंपनी के पत्र के बाद बदला घटनाक्रम?
निगम प्रबंधन ने टेंडर रद्द करने के पीछे तकनीकी कारण बताए हैं। हालांकि, सूत्रों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया के बीच एक कंपनी की ओर से शासन स्तर पर पत्र भेजा गया था। बताया जा रहा है कि पत्र में बसों की आपूर्ति से संबंधित आग्रह किया गया था।
इसके बाद उच्च स्तर से निर्देश मिलने और निगम स्तर पर टेंडर निरस्त किए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर प्रबंधन ने केवल तकनीकी कारणों का ही उल्लेख किया है।
पहले भी उठते रहे हैं टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
उत्तराखंड परिवहन निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। बसों की खरीद सहित अलग-अलग प्रक्रियाओं में समय-समय पर निविदा की शर्तों और निर्णय लेने के तरीके को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अब 200 नई बसों की खरीद की प्रक्रिया बोली दाखिल होने के तुरंत बाद रद्द किए जाने से एक बार फिर निगम की टेंडर व्यवस्था चर्चा में आ गई है। खास तौर पर तब, जब दो प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां तय समय सीमा में अपनी बोली दाखिल कर चुकी थीं।
निगम का दावा, जल्द शुरू होगी नई निविदा प्रक्रिया
उत्तराखंड परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी ने बताया कि नई बसों की खरीद का टेंडर तकनीकी कारणों के चलते निरस्त किया गया है। उन्होंने कहा कि बसों की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा।
इससे संकेत है कि निगम 200 बसों की खरीद की योजना को फिलहाल रोक नहीं रहा है, बल्कि मौजूदा निविदा निरस्त करने के बाद नई प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।
अब नए टेंडर पर टिकी निगाहें
मौजूदा टेंडर के अचानक निरस्त होने के बाद अब सबसे अहम सवाल यही है कि नई निविदा में क्या बदलाव किए जाते हैं और नई प्रक्रिया कितनी पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है। साथ ही यह भी देखना होगा कि नई निविदा में कितनी कंपनियां हिस्सा लेती हैं और निगम तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड परिवहन निगम की 200 नई बसों की खरीद का टेंडर बोली प्रक्रिया पूरी होने के ठीक अगले दिन निरस्त होने से कई सवाल खड़े हुए हैं। निगम ने तकनीकी कारणों को आधार बताया है, जबकि सूत्रों के स्तर पर उच्च अधिकारियों के निर्देश और एक कंपनी के पत्र की चर्चा है। अब निगम जल्द नई निविदा जारी करने की बात कह रहा है। ऐसे में नई प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्पष्ट नियम और निर्णय की वजहों को लेकर स्थिति साफ होना महत्वपूर्ण होगा।


