ऋषिकेश | 10 सितंबर 2026
ऋषिकेश के आईडीपीएल-गीतानगर क्षेत्र में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबर ने लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि अस्पताल से मृत अवस्था में घर लाए गए बुजुर्ग रास्ते में अचानक जिंदा हो गए। इसके बाद उनके परिजनों के पास रिश्तेदारों और परिचितों के लगातार फोन आने लगे। हालांकि, जब मामले की वास्तविकता सामने आई तो कहानी कुछ अलग निकली।
परिजनों के अनुसार बुजुर्ग पिछले तीन दिनों से जौलीग्रांट स्थित अस्पताल में उपचाराधीन थे। उनकी दोनों किडनियां और हार्ट गंभीर रूप से खराब होने के कारण हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। चिकित्सकों ने परिजनों को पहले ही उनकी गंभीर स्थिति के बारे में जानकारी दे दी थी।
चिकित्सकों ने घर ले जाने की दी थी सलाह
परिजनों के मुताबिक बुधवार को अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि बुजुर्ग की स्थिति काफी गंभीर है और अब उन्हें घर पर ही सेवा-सुश्रूषा देने की सलाह दी गई। इसके बाद अस्पताल से बुजुर्ग को ऑक्सीजन सिलेंडर और एंबुलेंस की मदद से घर के लिए रवाना किया गया।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल की ओर से बुजुर्ग को मृत घोषित नहीं किया गया था। चिकित्सकों ने केवल उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए घर ले जाने की सलाह दी थी।
एंबुलेंस के झटके से अचानक खुल गई बुजुर्ग की आंखें
घर लौटते समय गुमानीवाला रेलवे फाटक के पास सड़क पर बने गड्ढे से एंबुलेंस गुजरने के दौरान बुजुर्ग के शरीर में हलचल हुई और उनकी आंखें अचानक खुल गईं। इस घटना से परिजन हैरान रह गए।
बुजुर्ग के आंखें खोलने के बाद परिजन उन्हें उपचार के लिए एम्स ले जाने की कोशिश करने लगे। हालांकि, बाद में आपसी सलाह के बाद वे एम्स के गेट से वापस लौट आए और शहर के एक निजी अस्पताल में उपचार कराने की तैयारी करने लगे।
आखिरकार घर ले गए, देर रात हुई मौत
परिजनों के अनुसार निजी अस्पताल ले जाने को लेकर विचार-विमर्श के बाद उन्होंने बुजुर्ग को घर पर ही रखने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्हें घर ले जाया गया, जहां देर रात उनकी मौत हो गई।
बुजुर्ग की मौत के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की खबरें प्रसारित होने लगीं। कुछ लोगों ने इसे अस्पताल से मृत घोषित किए गए व्यक्ति के दोबारा जिंदा होने की घटना के रूप में प्रचारित कर दिया।
परिजनों ने सोशल मीडिया की खबर को बताया भ्रामक
वायरल खबर के बाद बुजुर्ग के रिश्तेदार और परिचित लगातार परिजनों को फोन करने लगे। इसके बाद परिजनों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जिस तरह से घटना को पेश किया जा रहा है, वह सही नहीं है।
परिजनों ने बताया कि जौलीग्रांट अस्पताल के चिकित्सकों ने बुजुर्ग की हालत को बेहद गंभीर बताया था, लेकिन उन्हें मृत घोषित किए जाने की बात नहीं कही थी। अस्पताल से घर लाने के दौरान रास्ते में बुजुर्ग की आंखें खुलना और बाद में घर पर उनकी मृत्यु होना पूरे घटनाक्रम का हिस्सा था।
वायरल खबर ने बढ़ाया परिवार का तनाव
परिजनों के मुताबिक सोशल मीडिया पर घटना को अलग रूप में पेश किए जाने के कारण उनके पास लगातार फोन आने लगे। इससे परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संवेदनशील घटना की जानकारी को बिना पुष्टि के सोशल मीडिया पर साझा न करें। इससे न केवल गलत सूचना फैलती है, बल्कि संबंधित परिवार को भी अनावश्यक परेशानी होती है।
निष्कर्ष
ऋषिकेश में 80 वर्षीय बुजुर्ग से जुड़ी वायरल खबर के पीछे की वास्तविकता सामने आने के बाद साफ हुआ कि उन्हें अस्पताल में मृत घोषित नहीं किया गया था। उनकी हालत पहले से गंभीर थी और चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें घर लाया जा रहा था। रास्ते में उनकी आंखें खुलीं, जिसके बाद परिजनों ने उपचार कराने पर विचार किया, लेकिन अंततः उन्हें घर ले जाया गया, जहां देर रात उनकी मृत्यु हो गई। इस पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया पर अलग तरीके से पेश किए जाने के कारण भ्रम की स्थिति बनी। ऐसे में किसी भी संवेदनशील खबर को प्रसारित करने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।


