देहरादून | 10 सितंबर 2026
देहरादून जिले में नशे के बढ़ते नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन अब कार्रवाई के साथ तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। जिले में नशे से प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर उनकी जीआईएस मैपिंग कराई जाएगी। इसके बाद इन इलाकों की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त, तस्करी और सेवन से जुड़ी गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन का मानना है कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित रखने के बजाय उन स्थानों की पहचान करना भी जरूरी है, जहां अवैध कारोबार या नशे का सेवन ज्यादा होने की आशंका है।
नशे से प्रभावित इलाकों का तैयार होगा डिजिटल नक्शा
जिले के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जिन्हें नशे के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इन इलाकों को जीआईएस तकनीक के माध्यम से मैप किया जाएगा। इससे पुलिस और प्रशासन के पास नशे से जुड़े हॉटस्पॉट का एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।
मैपिंग के आधार पर इन क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई की रणनीति तैयार की जा सकेगी। साथ ही समय-समय पर यह भी समीक्षा की जाएगी कि किन इलाकों में नशे की गतिविधियां बढ़ रही हैं और कहां स्थिति में सुधार हुआ है।
नशे के नेटवर्क पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त और अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नशे की सप्लाई करने वाले लोगों और उनके नेटवर्क तक पहुंचकर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही नशे की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों को भी लगातार मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
एडीएम की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय एनकार्ड समिति की बैठक
यह निर्णय जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान के निर्देश पर बुधवार को आयोजित जिला स्तरीय एनकार्ड समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार ने की।
एडीएम ने कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर युवा पीढ़ी के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए नशे के खिलाफ कार्रवाई के साथ समाज के स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है।
पुलिस को दिए जीआईएस मैपिंग के निर्देश
बैठक में पुलिस विभाग को जिले के सभी नशा प्रभावित क्षेत्रों की जीआईएस मैपिंग कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि ऐसे स्थानों को विशेष रूप से चिन्हित किया जाए, जहां मादक पदार्थों का अवैध कारोबार या सेवन अधिक होने की जानकारी मिल रही है।
इन संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया।
विभागों को अभियान की नियमित समीक्षा के निर्देश
एडीएम ने सभी संबंधित विभागों को अपने स्तर पर चलाए जा रहे नशा विरोधी अभियानों और जागरूकता कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि उसके स्पष्ट और सकारात्मक परिणाम दिखाई देने चाहिए।
प्रशासन का फोकस कार्रवाई के साथ-साथ युवाओं और आम लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने पर भी रहेगा।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
जिला स्तरीय एनकार्ड समिति की बैठक में सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा, सीओ अंकित कंडारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल और आबकारी निरीक्षक शिव प्रसाद व्यास समेत विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने नशे की रोकथाम के लिए अपने-अपने विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी बैठक में साझा की।
निष्कर्ष
देहरादून में नशे के खिलाफ प्रशासन अब पारंपरिक कार्रवाई के साथ तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने जा रहा है। जीआईएस मैपिंग के जरिए नशे के हॉटस्पॉट की पहचान होने से पुलिस और प्रशासन को संवेदनशील इलाकों पर केंद्रित निगरानी और कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ जागरूकता अभियानों को लगातार चलाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नशे के अवैध नेटवर्क पर लगाम लगाने के साथ युवाओं को भी इस खतरे से दूर रखा जा सके।


