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लाखामंडल में 40 लकड़ी की सिल्ली मिलने पर विवाद, भाजपा नेत्री बचना शर्मा ने वन विभाग पर उठाए सवाल

स्थान: लाखामंडल, विकासनगर (देहरादून), उत्तराखंड
दिनांक: 21 अक्टूबर 2026

देहरादून जिले के चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत लाखामंडल क्षेत्र में लकड़ी की 40 सिल्लियां पकड़े जाने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा की विशेष आमंत्रित कार्यकारिणी सदस्य बचना शर्मा ने इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय रेंजर पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जंगल से सड़क तक कैसे पहुंचीं 40 लकड़ी की सिल्लियां?

भाजपा नेत्री बचना शर्मा ने सवाल उठाया कि यदि जंगल में पेड़ों की कटाई हुई, लकड़ी की सिल्लियां तैयार की गईं और उन्हें खेतों के रास्ते सड़क तक लाया गया, तो इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वन विभाग के कर्मचारी कहां थे।

उन्होंने कहा कि एक पूरी गाड़ी में लकड़ी भरकर यहां तक पहुंच गई, लेकिन विभाग को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिली? उनके अनुसार, इस मामले की जांच होनी चाहिए कि लकड़ी कहां से काटी गई और इसे मौके तक लाने में किन लोगों की भूमिका रही।

अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप

बचना शर्मा ने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ अधिकारी कथित तौर पर गरीब ग्रामीणों से पैसे लेकर जंगलों में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने स्थानीय रेंजर विनोद चौहान पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वह पुराने समय से घरों में रखी लकड़ी को उठाने के लिए ग्रामीणों के घरों तक पहुंच जाते हैं।

भाजपा नेत्री का कहना है कि ग्रामीणों के घरों में वर्षों से रखी पुरानी लकड़ी को लेकर कार्रवाई की जाती है, जबकि 40 लकड़ी की सिल्लियां तैयार होकर मौके तक कैसे पहुंचीं, इसका जवाब विभाग को देना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

पहाड़ के पुराने मकानों और ग्रामीणों के अधिकारों का उठाया मुद्दा

बचना शर्मा ने पहाड़ी क्षेत्रों में लकड़ी के पारंपरिक इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि यहां ग्रामीणों के पुराने मकान बनाने में लकड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने दावा किया कि कई परिवारों को पीढ़ियों से चली आ रही लकड़ी या नियमानुसार मिली रियायती लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ कार्रवाई करते समय विभाग को नियमों और उनकी परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए। उनके मुताबिक, गरीब परिवारों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए और अवैध कटान के मामलों में भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

वन मंत्री और डीएफओ से निष्पक्ष जांच की मांग

भाजपा नेत्री ने वन मंत्री सुबोध उनियाल और डीएफओ से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को मौके पर जाकर यह पता लगाना चाहिए कि जंगल में पेड़ों की कटाई कहां हुई, लकड़ी किसकी है और उसे परिवहन कर यहां तक कैसे पहुंचाया गया।

उन्होंने संबंधित रेंजर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की भी मांग उठाई। बचना शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों के कथित शोषण पर रोक नहीं लगी, तो वह आंदोलन करेंगी। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर स्वयं वन मंत्री और उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराएंगी।

निष्कर्ष

लाखामंडल में 40 लकड़ी की सिल्लियां पकड़े जाने का मामला अब वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और ग्रामीणों के साथ होने वाली कार्रवाई को लेकर विवाद का विषय बन गया है। भाजपा नेत्री बचना शर्मा ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब मामले में वन विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे, जिनसे लकड़ी के स्रोत, कटान की स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी।

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