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देहरादून में 23 अक्टूबर से सजेगा विरासत महोत्सव, इस बार लगेगी एंट्री फीस; नए वेन्यू पर होंगे देश-विदेश के कलाकारों के कार्यक्रम

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 21 अक्टूबर 2026

देहरादून में कला, संगीत और संस्कृति के प्रेमियों के लिए विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल 2026 की शुरुआत 23 अक्टूबर से होने जा रही है। इस बार महोत्सव में दो बड़े बदलाव किए गए हैं। पहला, आयोजन स्थल को बदलकर नींबूवाला स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर किया गया है और दूसरा, दर्शकों के लिए प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है। 6 नवंबर तक चलने वाले इस 15 दिवसीय आयोजन में भारतीय शास्त्रीय संगीत, उत्तराखंड की लोक संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों, साहित्यिक कार्यक्रमों और हस्तशिल्प का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

पहली बार सामान्य प्रवेश के लिए भी देना होगा शुल्क

रिच (REACH) संस्था की ओर से आयोजित होने वाले इस महोत्सव में सामान्य प्रवेश के लिए 50 रुपये का टिकट रखा गया है। संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष आरके सिंह ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान आयोजन की तैयारियों, टिकट व्यवस्था और कार्यक्रमों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 50 रुपये के सामान्य टिकट से दर्शक प्रदर्शनियों, क्राफ्ट बाजार, खानपान, फाइन डाइनिंग, आर्ट गैलरी और लिटरेचर फेस्टिवल जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, ऑडिटोरियम में होने वाले विशेष कार्यक्रमों के लिए अलग से टिकट लेना होगा।

विशेष संगीत कार्यक्रमों और इमर्सिव एक्सपीरियंस के टिकट 300 और 500 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किए गए हैं। वहीं, महोत्सव के सभी 15 दिनों के कार्यक्रमों का आनंद लेने के इच्छुक लोगों के लिए 3,500 से 6,000 रुपये तक के ऑल-एक्सेस पास उपलब्ध होंगे।

बदला आयोजन स्थल, पार्किंग की समस्या दूर करने की कोशिश

पिछले वर्षों में महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने से यातायात जाम और पार्किंग की परेशानी सामने आती रही है। कई बार दर्शकों को बड़े कलाकारों की प्रस्तुतियों तक पहुंचने में भी दिक्कत होती थी। इसी समस्या को देखते हुए इस बार आयोजन स्थल बदलने का फैसला लिया गया है।

आरके सिंह के अनुसार, इस बार नींबूवाला स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नई जगह पर ओएनजीसी की ओर से उपलब्ध कराए गए परिसर में करीब चार एकड़ में पार्किंग की व्यवस्था है। पार्किंग क्षेत्र से सांस्कृतिक केंद्र तक सीधा रास्ता भी बनाया गया है, ताकि दर्शकों को आने-जाने में सुविधा हो।

आयोजकों का लक्ष्य विरासत महोत्सव को राष्ट्रीय स्तर के साथ अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। इस बार ऑडिटोरियम में कुल 29 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही थिएटर फेस्टिवल की भी शुरुआत होगी।


परवीन सुल्ताना से ऊषा उत्थुप तक, कई दिग्गज कलाकार करेंगे प्रस्तुति

इस वर्ष के महोत्सव में भारतीय संगीत जगत के कई चर्चित नाम अपनी प्रस्तुतियां देंगे। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रसिद्ध गायिका बेगम परवीन सुल्ताना, कर्नाटक संगीत के गायक टीएम कृष्णा और प्रख्यात वायलिन वादक डॉ. एन. राजम प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं।

इसके अलावा इंडियन ओशन बैंड, सूफी गायक ओसमान मीर, महेश काले, राहुल देशपांडे और जसबीर जस्सी भी दर्शकों के सामने अपनी कला प्रस्तुत करेंगे।

महोत्सव का समापन 6 नवंबर को मशहूर गायिका ऊषा उत्थुप की प्रस्तुति के साथ होगा। वहीं, उद्घाटन समारोह में छोलिया नृत्य, उप्रेती बहनों का लोक संगीत और पंडित साजन मिश्रा एवं स्वरांश मिश्रा की शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति कार्यक्रम को खास बनाएगी।

श्रीलंका और कजाकिस्तान के कलाकार भी दिखाएंगे अपनी संस्कृति

विरासत महोत्सव में इस बार देश की सीमाओं से बाहर की सांस्कृतिक परंपराओं को भी मंच मिलेगा। श्रीलंका और कजाकिस्तान के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से वहां की लोक कला और संगीत की झलक पेश करेंगे।

इसके साथ ही उत्तराखंड की गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी संस्कृति को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। विभिन्न लोक कलाकार पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम में लोक नाट्य ‘चक्रव्यूह’ के साथ कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी जैसे शास्त्रीय नृत्य भी शामिल रहेंगे। सरोद, सितार, बांसुरी और वीणा वादन के जरिए भारतीय संगीत की विविध परंपराओं से दर्शक रूबरू हो सकेंगे।

साहित्य, मुशायरे और थिएटर के शौकीनों के लिए भी खास आयोजन

यह महोत्सव केवल संगीत और नृत्य तक सीमित नहीं रहेगा। साहित्य प्रेमियों के लिए साहित्यिक सत्र, अपराध साहित्य पर चर्चा, दास्तानगोई, मुशायरा और कवि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों में शीन काफ निजाम, राजेश रेड्डी और इकबाल अशहर समेत कई जाने-माने शायरों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

स्कूली बच्चों के लिए विरासत हेरिटेज क्विज, शिल्प ट्रेजर हंट और शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य से संबंधित गतिविधियां भी रखी गई हैं। इसके जरिए विद्यार्थियों को भारतीय कला और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

हस्तशिल्प बाजार में दिखेगी पारंपरिक कला की झलक

महोत्सव के क्राफ्ट बाजार में खरीदारी करने वालों के लिए भी कई विकल्प रहेंगे। यहां पारंपरिक परिधान, सूखे मेवे, लकड़ी की नक्काशी से बनी वस्तुएं, धातु शिल्प और फर्नीचर जैसी चीजें उपलब्ध होंगी।

इसके अतिरिक्त विंटेज कार एवं बाइक रैली, सुपरबाइक रैली और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी लोक नाट्य प्रस्तुति भी आयोजन का हिस्सा होंगी। इस तरह दर्शकों को कला, संस्कृति, मनोरंजन और खरीदारी का एक साथ अनुभव मिल सकेगा।

संस्कृति को बढ़ावा देना है महोत्सव का उद्देश्य

रिच संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष आरके सिंह के अनुसार, विरासत महोत्सव का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ देश-विदेश की कला परंपराओं को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।

आयोजकों को उम्मीद है कि नए आयोजन स्थल और बेहतर पार्किंग व्यवस्था से दर्शकों को पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिलेगी। हालांकि, इस बार प्रवेश शुल्क लागू होने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया भी महोत्सव के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

निष्कर्ष

देहरादून में 23 अक्टूबर से 6 नवंबर तक आयोजित होने वाला विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल 2026 इस बार नए स्थान, निर्धारित प्रवेश शुल्क और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण खास रहने वाला है। परवीन सुल्ताना, टीएम कृष्णा और ऊषा उत्थुप जैसे कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति और विदेशी कलाकारों की कला भी दर्शकों को देखने को मिलेगी। अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि नई व्यवस्था के बीच यह महोत्सव दर्शकों को कितना आकर्षित करता है।

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