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बदरीनाथ दर्शन के बाद घर लौटने का था इंतजार, जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसे में पांच दोस्तों समेत छह की मौत

स्थान: जोशीमठ/देहरादून, उत्तराखंड
तिथि: 31 अक्टूबर 2026

आस्था की यात्रा पर निकले पांच दोस्तों का सफर कभी घर तक नहीं पहुंच सका। बदरीनाथ धाम के दर्शन करने के बाद सभी हेलीकॉप्टर से देहरादून लौट रहे थे, लेकिन जोशीमठ के पास हुए हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। इस दुर्घटना में पांच यात्रियों के साथ हेलीकॉप्टर के पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल की भी मौत हो गई। हादसे की खबर से छह परिवारों में मातम पसरा है।

दोस्तों के साथ शुरू हुई यात्रा बन गई आखिरी सफर

बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों से आए पांच दोस्तों ने चारधाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ धाम के दर्शन किए थे। दर्शन के बाद सभी को हेलीकॉप्टर के जरिए देहरादून लौटना था। परिवारों को उम्मीद थी कि जल्द ही उनके अपने सुरक्षित घर पहुंच जाएंगे, लेकिन यह इंतजार कभी खत्म नहीं हो सका।

जोशीमठ के पास हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने पांच दोस्तों की दोस्ती का सफर हमेशा के लिए खत्म कर दिया। उनके साथ उड़ान भर रहे दिल्ली निवासी पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल की भी जान चली गई। किसी को अपने बच्चों के पास लौटना था तो किसी को परिवार और कामकाज की जिम्मेदारियां संभालनी थीं। हादसे ने इन सभी उम्मीदों को एक झटके में खत्म कर दिया।

दो बच्चों के पिता थे पुलिस निरीक्षक अरुण सालुंके

हादसे में जान गंवाने वालों में 44 वर्षीय अरुण सालुंके भी शामिल थे। वह बेंगलुरु पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) में निरीक्षक के पद पर तैनात थे। मूल रूप से महाराष्ट्र के बेलगावी जिले के अरटाल गांव के रहने वाले अरुण बेंगलुरु के राममूर्ति नगर में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे।

उन्होंने पुलिस सेवा में उपनिरीक्षक और सर्किल निरीक्षक के तौर पर काम किया था। बाद में वह केंद्रीय अपराध शाखा की तकनीकी इकाई में तैनात हुए। ड्यूटी के दौरान अपराधियों से मुकाबला करने वाले अरुण अपने परिवार के लिए एक जिम्मेदार पति और पिता थे। यात्रा से लौटने के बाद उन्हें फिर अपने परिवार के बीच लौटना था, लेकिन अब उनके दोनों बच्चे पिता की राह देखते रह जाएंगे।

प्रताप बी. निंगराजू के दो बेटों से उठा पिता का साया

41 वर्षीय प्रताप बी. निंगराजू बेंगलुरु में सिविल ठेकेदारी का काम करते थे। वह अपने माता-पिता के साथ रहते थे और उनके दो बेटे हैं। दोस्तों के साथ धार्मिक यात्रा पर निकले प्रताप के लिए भी यह सफर रोजमर्रा की व्यस्तताओं से दूर कुछ समय बिताने का मौका रहा होगा।

बदरीनाथ के दर्शन के बाद परिवार को उनके लौटने की उम्मीद थी, लेकिन घर तक पहुंचने से पहले ही उनकी जिंदगी थम गई। इस हादसे में उनके माता-पिता ने अपना बेटा खो दिया और दो बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।

शंकर गौड़ा और सुधीर के. भी थे वकालत के पेशे से जुड़े

हेलीकॉप्टर हादसे में 39 वर्षीय वीबी शंकर गौड़ा और 49 वर्षीय सुधीर के. की भी मौत हुई है। शंकर गौड़ा कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल से जुड़े अधिवक्ता थे, जबकि सुधीर के. भी वकालत के पेशे में थे।

दोनों अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ चारधाम यात्रा पर निकले थे। बदरीनाथ के दर्शन के बाद सभी को वापस लौटना था, लेकिन यह यात्रा उनके परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द बन गई।

शिक्षण संस्थान की जिम्मेदारी संभालते थे एचएस नटराज

इस हादसे में जान गंवाने वाले पांचवें यात्री 51 वर्षीय एचएस नटराज थे। वह कर्नाटक के तुमकुर जिले के हुलियुरुदुर्ग क्षेत्र में विद्या भारती शिक्षण संस्थान के प्रमुख थे।

नटराज शिक्षा जगत से जुड़े होने के साथ संस्थान की जिम्मेदारियां भी संभालते थे। बदरीनाथ धाम के दर्शन के बाद उन्हें अपने परिवार और संस्थान के कामकाज के बीच लौटना था। उनकी असमय मौत से परिजनों के साथ-साथ शिक्षण संस्थान से जुड़े लोगों को भी गहरा सदमा पहुंचा है।

कैप्टन हिमांशु सभरवाल भी नहीं लौट सके घर

हेलीकॉप्टर के पायलट 48 वर्षीय कैप्टन हिमांशु सभरवाल दिल्ली के शालीमार बाग के निवासी थे। वह पांचों यात्रियों को बदरीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा लेकर आ रहे थे। इसी दौरान जोशीमठ के पास हुए हादसे में उनकी भी जान चली गई।

हिमांशु की जिम्मेदारी यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने की थी, लेकिन यह उड़ान उनकी जिंदगी की आखिरी उड़ान साबित हुई। उनके परिवार के लिए भी अब घर लौटने की उम्मीद हमेशा के लिए टूट गई है।

आस्था की यात्रा के बाद परिवारों के हिस्से आया गहरा दुख

जो पांच दोस्त बदरीनाथ धाम में दर्शन कर सुरक्षित घर लौटने की योजना बना रहे थे, वे अब कभी अपने परिवारों के बीच नहीं पहुंच सकेंगे। किसी घर ने पिता खोया, किसी ने बेटा और किसी ने अपना जीवनसाथी। वहीं हेलीकॉप्टर के पायलट के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

जोशीमठ के पास हुआ यह हादसा छह परिवारों के लिए ऐसी त्रासदी बन गया, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। धार्मिक यात्रा पर निकले इन लोगों की घर वापसी की प्रतीक्षा अब कभी पूरी नहीं होगी।

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