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उत्तराखंड का ऐतिहासिक रहस्य फिर खुला: कालसी के अश्वमेध यज्ञ स्थल पर 73 साल बाद खुदाई, प्राचीन ईंटें और मिट्टी के बर्तन मिले

कालसी (चकराता) | उत्तराखंड
दिनांक: 09 जनवरी 2026

उत्तराखंड की धरती एक बार फिर अपने प्राचीन गौरव की झलक दिखा रही है। चकराता क्षेत्र के कालसी स्थित जगतग्राम बाढ़वाला में मौजूद ऐतिहासिक अश्वमेध यज्ञ स्थल पर 73 वर्षों के अंतराल के बाद दोबारा पुरातात्विक खुदाई शुरू की गई है। इस खुदाई में अब तक मिट्टी के बर्तन, जले हुए कोयले और ईंटों के अवशेष मिलने से इतिहास के कई अनछुए अध्याय खुलने की उम्मीद जगी है।


चौथी वेदिका की तलाश में शुरू हुई खुदाई

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) इस स्थल पर चौथी अश्वमेध यज्ञ वेदिका की खोज कर रहा है। शास्त्रीय विवरणों के अनुसार, प्राचीन काल में यहां चार वेदिकाओं पर अश्वमेध यज्ञ संपन्न हुए थे, जिनमें से तीन वेदिकाएं पहले ही खोजी जा चुकी हैं
अब चौथी वेदिका की खोज को ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


एक मीटर नीचे मिली सभ्यता की परतें

खुदाई के दौरान जमीन की एक मीटर से अधिक गहराई में मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े और जले हुए कोयले के अवशेष सामने आए हैं।
गुरुवार को की गई खुदाई में ईंटों के टुकड़े भी मिले हैं, जो इस स्थल के विधिवत निर्माण और यज्ञीय संरचनाओं की पुष्टि करते हैं।


राजा शीलबर्मन से जुड़ा है यज्ञ स्थल

यह अश्वमेध यज्ञ स्थल तीसरी शताब्दी ईस्वी के कुणिंद शासक राजा शीलबर्मन से जुड़ा हुआ है।
कालसी गेट के समीप स्थित प्रसिद्ध अशोक शिलालेख के पास जगतग्राम बाढ़वाला क्षेत्र में यह स्थल स्थित है।
इस यज्ञ स्थल की पहली बार पहचान वर्ष 1953–54 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा की गई खुदाई के दौरान हुई थी।


राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा प्राप्त स्थल

इतिहासकारों के अनुसार, राजा शीलबर्मन ने कुल चार अश्वमेध यज्ञ स्थल बनवाए थे। पूर्व की खुदाई में तीन वेदिकाएं मिल चुकी थीं, जिन्हें वर्तमान में संरक्षित किया गया है।
इस स्थल को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा भी प्रदान किया गया है, जिससे इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है।


दिसंबर 2025 से चल रही है खुदाई

चौथी वेदिका की खोज के उद्देश्य से 1 दिसंबर 2025 से जगतग्राम में खुदाई का कार्य पुनः प्रारंभ किया गया, जो अभी भी जारी है।
प्रारंभिक चरण में मिले अवशेषों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है, ताकि स्थल का वास्तविक कालक्रम और संरचना स्पष्ट हो सके।


पुरातत्व विभाग का बयान

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सहायक पुरातत्वविद पी.एस. राणा ने बताया कि स्थल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए यह खुदाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि चौथी वेदिका की खोज से न केवल इस स्थल का महत्व और बढ़ेगा, बल्कि कुणिंद कालीन सभ्यता और धार्मिक परंपराओं पर भी नया प्रकाश पड़ेगा।


निष्कर्ष

कालसी का अश्वमेध यज्ञ स्थल उत्तराखंड की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रमाण है।
73 साल बाद शुरू हुई यह खुदाई इतिहास के छिपे हुए तथ्यों को सामने लाने की दिशा में एक अहम कदम है। यदि चौथी वेदिका की पुष्टि होती है, तो यह खोज न केवल उत्तराखंड बल्कि भारतीय पुरातात्विक इतिहास में एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज होगी।

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