हरिद्वार | 18 जनवरी 2026
हरिद्वार स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में अखंड ज्योति प्रज्वलन एवं माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी समारोह का भव्य शुभारंभ हो गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर बैरागी कैंप में विशाल आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए साधक, श्रद्धालु और विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की।
उद्घाटन समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की गरिमामयी उपस्थिति रही। ध्वज वंदन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक रूप से स्वयं को पुनः स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो भारत कभी गुलामी की मानसिकता से जूझ रहा था, आज वही भारत अपनी परंपराओं, मूल्यों और विरासत पर गर्व कर रहा है।
यह आयोजन पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना के सौ वर्ष पूर्ण होने, अखंड ज्योति की स्थापना तथा माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। अखिल विश्व गायत्री परिवार के हजारों साधक इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बन रहे हैं।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के 1500 मेधावी होंगे सम्मानित
समारोह के अंतर्गत त्रिवेणी संगम के दौरान देव संस्कृति विश्वविद्यालय का सातवां दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया जा रहा है। 19 जनवरी को होने वाले इस कार्यक्रम में लगभग डेढ़ हजार विद्यार्थियों को स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट की उपाधियां प्रदान की जाएंगी। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मेडल देकर सम्मानित किया जाएगा।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं समारोह दल नायक डॉ. चिन्मय पंड्या ने बताया कि यह दीक्षांत समारोह भारतीय संस्कृति आधारित उच्च शिक्षा की विशिष्ट पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह देश-विदेश से आए करीब 60 हजार साधकों की उपस्थिति में राष्ट्र की चर्चित हस्तियों के हाथों संपन्न होगा।
इस अवसर पर आध्यात्मिक संतों के साथ राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहेंगे। आयोजन को लेकर पूरे शांतिकुंज क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्सव का वातावरण बना हुआ है।
आदिवासी स्वयंसेवकों का विशाल सम्मेलन भी होगा आयोजित
इसी दिन सायंकाल मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी स्वयंसेवकों का विशाल सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और आत्मिक उत्थान का संदेश दिया जाएगा।
निष्कर्ष:
शांतिकुंज का यह शताब्दी समारोह न केवल आध्यात्मिक चेतना का उत्सव है, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण भी है। देश-विदेश से आए साधकों और मेधावी छात्रों का सम्मान इस आयोजन को ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बना रहा है।


