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उत्तराखंड में बदला स्कूलों का समय, अब रोज 6 घंटे 20 मिनट होगी पढ़ाई, नई शिक्षा नीति लागू

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 7 अप्रैल 2026

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने स्कूलों की समयसारिणी में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रदेश के सभी राजकीय और निजी माध्यमिक एवं प्रारंभिक विद्यालय प्रतिदिन 6 घंटे 20 मिनट तक संचालित होंगे। यह समय पहले की तुलना में 1 घंटा 5 मिनट अधिक है।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के तहत लागू किया गया है। अब ग्रीष्मकाल और शीतकाल दोनों सत्रों में स्कूलों का समय समान रहेगा, जिससे पढ़ाई का एक समान ढांचा सुनिश्चित किया जा सके।

नई समयसारिणी में प्रत्येक पीरियड (वादन) की अवधि 40 मिनट निर्धारित की गई है। पहले ग्रीष्मकाल में यह अवधि 35 मिनट हुआ करती थी। इसके साथ ही प्रार्थना सभा का समय भी बढ़ाकर 20 मिनट कर दिया गया है, जो पहले 15 मिनट था।

शिक्षा विभाग के अनुसार, अब एक दिन में कुल 5 घंटे 20 मिनट पढ़ाई होगी, जबकि 1 घंटा प्रार्थना सभा और मध्यांतर के लिए निर्धारित किया गया है। इससे पहले साढ़े चार घंटे पढ़ाई और 45 मिनट प्रार्थना व मध्यांतर के लिए तय थे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, एक शैक्षणिक सत्र में कम से कम 33 सप्ताह और प्रति सप्ताह न्यूनतम 32 घंटे पढ़ाई अनिवार्य की गई है। इसी मानक को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर और पर्याप्त अध्ययन समय मिल सके।

एससीईआरटी के अपर निदेशक परमेंद्र सकलानी के अनुसार, समयसारिणी तय कर दी गई है, जबकि विषयवार पीरियड का निर्धारण अब स्कूल प्रबंधन करेगा। उन्होंने बताया कि बढ़े हुए समय से गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को अधिक समय दिया जा सकेगा, जिससे छात्रों की समझ बेहतर होगी।

नई समयसारिणी (संक्षेप में):
प्रार्थना सभा – 20 मिनट
प्रत्येक पीरियड – 40 मिनट
मध्यांतर – 40 मिनट
कुल अवधि – 6 घंटे 20 मिनट

ग्रीष्मकालीन सत्र – 1 अप्रैल से 30 सितंबर
शीतकालीन सत्र – 1 अक्टूबर से 31 मार्च

निष्कर्ष:
स्कूल समय में किया गया यह बदलाव शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बढ़े हुए अध्ययन समय से छात्रों को विषयों की बेहतर समझ मिलेगी और नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को लागू करने में मदद मिलेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल प्रबंधन इस अतिरिक्त समय का उपयोग किस प्रकार प्रभावी ढंग से करते हैं।

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