स्थान: ऋषिकेश, देहरादून (उत्तराखंड)
तारीख: 15 अप्रैल 2026
देहरादून जिले के ऋषिकेश में पुलिस ने अवैध रूप से रह रही एक बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। महिला पिछले करीब एक महीने से क्षेत्र में रह रही थी और अपनी पहचान छिपाकर रहन-सहन कर रही थी।
मामले का खुलासा करते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी नीरज सेमवाल ने बताया कि 15 अप्रैल को स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को सूचना मिली थी कि एक बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से ऋषिकेश में निवास कर रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संयुक्त टीम का गठन कर सघन चेकिंग अभियान शुरू किया गया।
पुलिस टीम ने नटराज चौक क्षेत्र में जांच के दौरान मुखबिर की सटीक सूचना पर गेट नंबर-3, डग रोड के पास एक संदिग्ध महिला को हिरासत में लिया। पूछताछ में महिला ने अपनी पहचान रीना उर्फ रीता, निवासी ढाका (बांग्लादेश) के रूप में बताई।
पूछताछ में महिला ने खुलासा किया कि वह करीब एक महीने पहले रिपोन नामक व्यक्ति की मदद से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क कर उसे भारत में रोजगार का लालच दिया था। भारत आने के बाद उसने पश्चिम बंगाल के पते पर फर्जी दस्तावेज बनवाकर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की।
महिला 13 अप्रैल को दिल्ली से बस के जरिए ऋषिकेश पहुंची थी। पुलिस ने उसके कब्जे से बांग्लादेश का राष्ट्रीय पहचान पत्र, फर्जी भारतीय आधार कार्ड, बांग्लादेशी नागरिकता प्रमाण पत्र की छायाप्रति और एक मोबाइल फोन बरामद किया है।
इस मामले में कोतवाली ऋषिकेश में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस महिला से गहन पूछताछ कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी शुरू कर दी गई है। जल्द ही आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में भी ऋषिकेश से एक बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया गया था, जो वर्ष 2014 से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां रह रही थी। उस महिला ने वोटर आईडी, पैन कार्ड, आधार कार्ड और यहां तक कि भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया था।
निष्कर्ष:
ऋषिकेश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की यह गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम संकेत है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है, जिससे भविष्य में इस तरह की घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।


