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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का सबसे खास हिस्सा: 12 किमी लंबा एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर

स्थान: देहरादून
तारीख: 15 अप्रैल 2026

Delhi-Dehradun Expressway के तहत गणेशपुर से डाटकाली तक बना 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन इस पूरी परियोजना का सबसे आकर्षक और अनोखा हिस्सा बनकर उभरा है। यह एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर माना जा रहा है, जहां से गुजरते हुए यात्रियों को रोमांचक अनुभव मिलता है।


यह एलिवेटेड रोड खास तौर पर वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इस क्षेत्र में हाथी, गुलदार और बाघ जैसे कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन होता है, इसलिए सड़क को जमीन से ऊपर बनाकर उनके मार्ग को सुरक्षित रखा गया है।


परियोजना से जुड़े इंजीनियरों के अनुसार, इस कॉरिडोर का निर्माण आसान नहीं था। National Highways Authority of India के इंजीनियरों और श्रमिकों को काम के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इंजीनियर मनोज कुमार ने बताया कि निर्माण के दौरान अक्सर वन्यजीवों का खतरा बना रहता था और कई बार गुलदार से आमना-सामना भी हुआ, हालांकि किसी प्रकार की दुर्घटना नहीं हुई।


इंजीनियर राहुल सिंह और आशीष रावत ने बताया कि इस संवेदनशील क्षेत्र में 24 घंटे काम करने की अनुमति नहीं थी। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार शाम 6 बजे तक हर हाल में काम बंद करना पड़ता था, ताकि वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियों में कोई बाधा न आए।


नेटवर्क की समस्या बनी बड़ी चुनौती

एलिवेटेड सेक्शन में मोबाइल नेटवर्क की भारी कमी के कारण निर्माण कार्य में दिक्कतें आती थीं। इंजीनियरों को सामग्री मंगाने या अन्य जरूरी कार्यों के लिए कई बार लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। आपात स्थिति में संपर्क स्थापित करना भी एक बड़ी चुनौती थी।


नदी क्षेत्र में निर्माण, मानसून में बढ़ी मुश्किलें

यह पूरा इलाका नदी क्षेत्र में आता है, जहां कई पिलर नदी के बीच खड़े किए गए हैं। मानसून के दौरान काम करना बेहद कठिन हो जाता था। कई बार तेज बहाव में स्टेजिंग और शटरिंग बह जाने जैसी घटनाएं भी सामने आईं, जिससे कार्य में देरी और नुकसान हुआ।


परियोजना से जुड़े सर्वेयर, सुपरवाइजर और श्रमिकों—केशव भट्ट, गुलशन वर्मा, आशाराम और महिपाल—ने बताया कि इतनी बड़ी और चुनौतीपूर्ण परियोजना का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है।


निष्कर्ष:
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का यह वाइल्डलाइफ कॉरिडोर न केवल इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का भी प्रतीक है। यह परियोजना आने वाले समय में देशभर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है।

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