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विधानसभा कूच में बवाल: महिला कांग्रेस नेत्री घायल, धामी सरकार पर हरक सिंह रावत का तीखा हमला

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 28 अप्रैल 2026

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मंगलवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। 33% महिला आरक्षण की मांग को लेकर महिला कांग्रेस ने विधानसभा कूच किया, जो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में बदल गया। इस दौरान एक कांग्रेस नेत्री घायल हो गईं और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।


सुबह करीब 11 बजे महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता हरिद्वार रोड स्थित एक होटल परिसर में एकत्रित हुईं। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला और कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने पैदल मार्च शुरू किया और विधानसभा की ओर कूच किया।


विधानसभा सत्र को देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट था। भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और रिस्पना पुल के पास बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। जैसे ही महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता बैरिकेडिंग के पास पहुंचीं, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।


इस दौरान अफरा-तफरी का माहौल बन गया और महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष अंशुल त्यागी अचानक बेहोश हो गईं। मौके पर मौजूद पुलिस ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल भिजवाया। घटना के बाद प्रदर्शन और उग्र हो गया, जिसके चलते पुलिस ने कई महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया।


प्रदर्शन में शामिल हरक सिंह रावत ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सरकार पूरी तरह मौन है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल दिखावे की राजनीति कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।


हरक सिंह रावत ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों को घेरा। उन्होंने कहा कि 2023 में महिला आरक्षण बिल पारित होने के बावजूद केंद्र सरकार 2027 में परिसीमन और जनगणना के नाम पर इसे टाल रही है। उनके मुताबिक, यह महिलाओं के साथ राजनीतिक छल है और उन्हें गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।


वहीं, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने भी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर संघीय ढांचे को कमजोर किया जा रहा है और राज्यों की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है।


निष्कर्ष:
देहरादून में हुआ यह प्रदर्शन केवल महिला आरक्षण की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राज्य की राजनीति में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है। पुलिस कार्रवाई, नेताओं के तीखे बयान और घायल कार्यकर्ता की घटना ने इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक तूल पकड़ सकता है।

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