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हीट वेव से बढ़ा बिजली संकट: उत्तराखंड में मांग 2647 मेगावाट पर पहुंची, सरकार ने निर्बाध आपूर्ति के लिए कसी कमर

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 28 अप्रैल 2026

देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और हीट वेव का असर अब बिजली खपत पर साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं रहा, जहां 25 अप्रैल को बिजली की पीक डिमांड 2647 मेगावाट दर्ज की गई, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में शामिल है।


राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। 24 अप्रैल को देश में अधिकतम बिजली मांग करीब 252 गीगावाट तक पहुंच गई, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मई और जून के महीनों में तापमान और बढ़ने के साथ बिजली की मांग में और इजाफा हो सकता है।


इस चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड सरकार सतर्क हो गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में ऊर्जा विभाग और यूपीसीएल (उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी महीनों के लिए निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।


बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि हीट वेव के कारण पूरे देश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि गैस की कमी के चलते गैस आधारित बिजली संयंत्रों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा नदियों में जल स्तर घटने से जल विद्युत उत्पादन में भी गिरावट आई है, जिससे आपूर्ति पर दबाव और बढ़ गया है।


उत्तराखंड में इस वर्ष औसतन करीब 5 प्रतिशत बिजली मांग में वृद्धि दर्ज की जा रही है। साथ ही, घरों में इंडक्शन कुकर, एसी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण अतिरिक्त 50 से 100 मेगावाट का लोड सिस्टम पर पड़ रहा है, जिससे खासकर शाम के पीक आवर्स में दबाव बढ़ जाता है।


यूपीसीएल ने भरोसा दिलाया है कि इन चुनौतियों के बावजूद उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली आपूर्ति देने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत अग्रिम बिजली खरीद, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और बेहतर ग्रिड प्रबंधन पर लगातार काम किया जा रहा है।


राज्य सरकार के प्रयासों के तहत केंद्र सरकार ने भी 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा ऊर्जा एक्सचेंज के माध्यम से भी अग्रिम बिजली खरीद की व्यवस्था की गई है, ताकि आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए।


वहीं, यूपीसीएल और हिमाचल प्रदेश के बीच बिजली बैंकिंग को लेकर भी बातचीत जारी है। इस व्यवस्था के तहत जरूरत के समय अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी, जिससे जून महीने में संभावित दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।


बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे विशेष रूप से शाम के पीक समय में बिजली का जिम्मेदारी से उपयोग करें और अनावश्यक उपकरणों के इस्तेमाल से बचें, ताकि सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से बिजली मिल सके।


निष्कर्ष:
उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं, जिससे ऊर्जा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। सरकार और ऊर्जा विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदम राहत देने वाले जरूर हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। यदि आपूर्ति और खपत के बीच संतुलन बनाए रखा गया, तभी आने वाले गर्म महीनों में बिजली संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा।

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