स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 28 अप्रैल 2026
तेजी से बढ़ते तापमान, घटती हरियाली और कंक्रीट के फैलते जंगल के बीच देहरादून को राहत देने के लिए अब ठोस शहरी योजना सामने आई है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने 968 करोड़ रुपये की व्यापक विकास योजना तैयार की है, जिसमें पहली बार शहर के तापमान को नियंत्रित करने को प्राथमिकता दी गई है।
एमडीडीए की हालिया बोर्ड बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई, जिसमें शहरी विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन को केंद्र में रखा गया है। प्राधिकरण का मानना है कि केवल निर्माण कार्यों का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि बदलते जलवायु परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी हो गया है।
योजना के तहत शहर में कूल रूफ तकनीक लागू करने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और नियोजित आवासीय व व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इन उपायों का उद्देश्य न केवल तापमान कम करना है, बल्कि बिजली की खपत को भी घटाना है।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, कूल रूफ तकनीक के जरिए भवनों के अंदर का तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है। इससे एयर कंडीशनर और कूलर पर निर्भरता घटेगी और ऊर्जा की बचत होगी।
इस तकनीक के तहत भवनों की छतों और विशेष रूप से दक्षिण दिशा की दीवारों पर रिफ्लेक्टिव पेंट लगाया जाएगा। यह पेंट सूर्य की किरणों को परावर्तित करता है, जिससे गर्मी भवन के भीतर प्रवेश नहीं कर पाती और सतह का तापमान कम बना रहता है।
शहर में अनियोजित विस्तार को रोकने के लिए विभिन्न आय वर्गों के लिए आवासीय परियोजनाएं भी विकसित की जाएंगी। इन योजनाओं में सड़क, जल निकासी, पार्किंग, सार्वजनिक स्थल और हरित क्षेत्र जैसी बुनियादी सुविधाओं को शामिल किया जाएगा, ताकि भविष्य में शहरी दबाव को संतुलित किया जा सके।
वहीं, हरबर्टपुर क्षेत्र में करीब नौ बीघा भूमि पर एक नए कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के विकास की योजना भी बनाई गई है। इससे विकासनगर-हरबर्टपुर क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और मुख्य शहर पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा।
एमडीडीए ने देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, सेलाकुई, हरबर्टपुर और विकासनगर सहित छह प्रमुख बेल्ट में हरित क्षेत्र बढ़ाने की रणनीति भी तैयार की है। इसके तहत सड़क किनारे हरित पट्टियां विकसित करना, डिवाइडर पर पौधारोपण, पार्कों का विस्तार और सार्वजनिक स्थलों पर हरियाली बढ़ाना शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंक्रीट के बढ़ते प्रभाव के बीच हरियाली में वृद्धि से ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव को कम किया जा सकता है, जिससे स्थानीय तापमान में गिरावट आएगी और शहर का पर्यावरण संतुलित रहेगा।
निष्कर्ष:
देहरादून को बढ़ती गर्मी से बचाने के लिए एमडीडीए की यह पहल एक दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखी जा रही है। कूल रूफ तकनीक, हरित क्षेत्र विस्तार और योजनाबद्ध विकास जैसे कदम शहर को भविष्य की जलवायु चुनौतियों के लिए तैयार कर सकते हैं। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो देहरादून न केवल रहने के लिए अधिक अनुकूल बनेगा, बल्कि सतत विकास का एक मॉडल भी बन सकता है।


