दिनांक: 3 मई 2026 | स्थान: हेमकुंड साहिब, चमोली
उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब की यात्रा को लेकर तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। भारी बर्फबारी के बीच सेना के जवानों और गुरुद्वारा प्रबंधन के सेवादारों ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए हेमकुंड साहिब तक पहुंच बना ली है। यहां पहुंचते ही जवानों ने सबसे पहले गुरुद्वारे के समक्ष अरदास कर सेवा कार्य की शुरुआत की।
गौरतलब है कि हेमकुंड साहिब के कपाट आगामी 23 मई 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इससे पहले यात्रा मार्ग को सुगम बनाने के लिए बर्फ हटाने का अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सेना की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड यूनिट, नौवीं माउंटेन ब्रिगेड और गुरुद्वारे के सेवादार कुछ दिन पहले ही रवाना हुए थे।
रास्ते में टीम को सबसे बड़ी चुनौती अटलाकोटी हिमखंड के रूप में मिली, जिसे काटकर आगे बढ़ना बेहद कठिन कार्य था। बावजूद इसके जवानों और सेवादारों ने साहस और समर्पण का परिचय देते हुए इस बाधा को पार किया और अंततः हेमकुंड साहिब तक पहुंचने में सफल रहे।
हेमकुंड पहुंचने के बाद जवानों और सेवादारों ने गुरुद्वारे में अरदास की और फिर यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने के कार्य में जुट गए। अब आने वाले दिनों में पूरे रास्ते को साफ कर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुगम बनाया जाएगा।
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि जवान और सेवादार बेहद विषम परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से क्षेत्र में लगातार बर्फबारी हो रही थी, जिससे कार्य और चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसके बावजूद टीम लगातार प्रयास कर रही है ताकि समय पर यात्रा शुरू हो सके।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियां भी इस कार्य में सहयोग कर रही हैं, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
निष्कर्ष
हेमकुंड साहिब यात्रा से पहले सेना के जवानों और सेवादारों का यह समर्पण और साहस आस्था और सेवा का अद्भुत उदाहरण है। कठिन मौसम और दुर्गम रास्तों के बावजूद यात्रा मार्ग को तैयार किया जा रहा है, जिससे लाखों श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपने धार्मिक सफर को पूरा कर सकें।


