देहरादून | 15 मई 2026
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां फर्जी निवेश योजना और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ओएनजीसी के एक सेवानिवृत्त अधिकारी से 1.87 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। मामले की जांच कर रही एसटीएफ उत्तराखंड ने इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड में शामिल एक आरोपी को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में आरोपी के खिलाफ देश के कई राज्यों में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें भी सामने आई हैं।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित 70 वर्षीय दिलीप कुमार श्रीवास्तव वर्ष 2016 में ओएनजीसी से सेवानिवृत्त हुए थे। बीती 31 जनवरी को उनके मोबाइल फोन पर निवेश योजना से जुड़ा एक संदेश आया। इसके बाद खुद को निवेश सलाहकार बताने वाली दीया मेहरा नाम की महिला ने उनसे संपर्क किया और उन्हें “एबीएसएल दि ग्रुप ऑफ विजडम” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि इस ग्रुप में लगातार शेयर बाजार में भारी मुनाफे के स्क्रीनशॉट, ट्रेडिंग अपडेट और अन्य लोगों की कथित कमाई दिखाकर भरोसा बनाया गया। साइबर ठगों ने खुद को प्रोफेशनल निवेश विशेषज्ञ और सेबी से पंजीकृत प्लेटफॉर्म से जुड़ा बताकर पीड़ित को बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया।
शिकायत के अनुसार, दीया मेहरा, अनन्या शास्त्री और खुद को प्रोफेसर ए. बालासुब्रमण्यम बताने वाले व्यक्ति ने मिलकर इस पूरे साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया। आरोपियों ने पीड़ित को हाई नेटवर्थ ट्रेडिंग अकाउंट खोलने और लगातार रकम निवेश करने के लिए उकसाया। झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 17 लाख 64 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
इसके अलावा आरोपियों ने ब्रोकरेज फीस और अन्य चार्ज के नाम पर करीब 70 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से जमा करा लिए। ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पीड़ित के खाते में करीब 14.50 करोड़ रुपये का फर्जी मुनाफा दिखाया गया, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि उनका निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
बाद में आरोपियों ने इनकम टैक्स क्लियरेंस और फंड रिलीज करने के नाम पर एक करोड़ रुपये और जमा करने की मांग की। इसी दौरान पीड़ित को ठगी का संदेह हुआ। जब उन्होंने अपनी राशि निकालने की कोशिश की तो उनका अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच में जुटी एसटीएफ और साइबर पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप गतिविधियों की जांच की। जांच के आधार पर पुलिस ने लुधियाना, पंजाब निवासी सुखराज को गिरफ्तार किया। आरोपी प्रेम विहार, नूराला रोड शिवपुरी क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए केवल दो महीने के लिए एक बैंक खाता खुलवाया था। इस खाते में कुछ ही दिनों के भीतर करीब 18 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ। इसमें से 5.60 लाख रुपये रिटायर्ड ओएनजीसी अधिकारी द्वारा भेजी गई रकम भी शामिल थी।
एसटीएफ के अनुसार, आरोपी के खिलाफ महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और गुजरात जैसे राज्यों में भी साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है। वहीं, कार्रवाई के दौरान साइबर पुलिस टीम ने पीड़ित के करीब 40 लाख रुपये होल्ड भी करा दिए हैं।
निष्कर्ष
देहरादून में सामने आया यह मामला साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क और ऑनलाइन निवेश ठगी के खतरनाक तरीकों को उजागर करता है। फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप ग्रुप और नकली निवेश सलाहकारों के जरिए लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी आधिकारिक जांच और सत्यापन बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे साइबर जाल से बचा जा सके।


