देहरादून/हरिद्वार, उत्तराखंड | मंगलवार, 26 मई 2026
उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दो बाघों की जहरीला पदार्थ खिलाकर हत्या किए जाने के मामले ने वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। मामले में अब विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए श्यामपुर रेंज के रेंजर समेत तीन वनकर्मियों को निलंबित कर दिया है। वहीं मुख्य आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है।
यह मामला हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज का है, जहां लगातार दो दिनों में दो बाघों के शव मिलने से पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया था।
जानकारी के अनुसार 18 मई को श्यामपुर रेंज क्षेत्र में पहला बाघ मृत अवस्था में मिला था। वन विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची तो बाघ के चारों पंजे गायब थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में तत्काल सर्च ऑपरेशन और कांबिंग अभियान शुरू किया गया।
अगले ही दिन जंगल के दूसरे हिस्से से एक और बाघ का शव बरामद हुआ। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बाघ के पंजे भी काटे गए थे। दोनों बाघों की उम्र लगभग दो वर्ष बताई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में वन विभाग को पता चला कि क्षेत्र में रहने वाले वन गूजर हमजा की एक भैंस को बाघ ने मार दिया था। आरोप है कि इसी का बदला लेने के लिए हमजा ने मृत भैंस के शव में जहरीला पदार्थ मिला दिया।
जहर मिला मांस खाने से दोनों बाघों की मौत हो गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक इसके बाद हमजा ने अपने चार अन्य साथियों के साथ मिलकर दोनों बाघों के पंजे काट लिए।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के पंजों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी होती है और इन्हें अवैध बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है।
घटना के बाद विभागीय स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई की गई है। दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप में श्यामपुर रेंज के रेंजर विनय कुमार राठी, फारेस्टर भूपेंद्र बिष्ट और फारेस्ट गार्ड करुण सैनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने यह आदेश जारी किए। निलंबित रेंजर विनय कुमार राठी को डीएफओ हरिद्वार कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि इस मामले में अब तक चार वन गूजरों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी हमजा ने सोमवार को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
वन विभाग अब हमजा को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रहा है ताकि पूरे नेटवर्क और घटना के पीछे की साजिश का खुलासा किया जा सके।
जांच के दौरान विभागीय टीम ने पंजे काटने में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी बरामद कर ली है, लेकिन दोनों बाघों के पंजे अब तक बरामद नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से वन विभाग को अब इस मामले में बड़े वन्यजीव तस्करी गिरोह की आशंका भी सताने लगी है।
अधिकारियों का मानना है कि यह केवल बदले की घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे शिकारियों और वन्यजीव तस्करों का नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है।
राजाजी टाइगर रिजर्व और आसपास के वन क्षेत्रों में पहले भी वन्यजीव तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि आरोपियों के संपर्क किन लोगों से थे और बाघों के पंजे कहां पहुंचाए जाने थे।
वन विभाग ने इस पूरे मामले की जांच तेज कर दी है और उच्च स्तर पर निगरानी की जा रही है।
निष्कर्ष
हरिद्वार की श्यामपुर रेंज में दो बाघों की जहरीला पदार्थ देकर हत्या और उनके पंजे काटे जाने की घटना ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय लापरवाही के चलते तीन वनकर्मियों का निलंबन और मुख्य आरोपी का आत्मसमर्पण इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ बदले की कार्रवाई थी या इसके पीछे वन्यजीव तस्करी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। जांच के आगामी निष्कर्ष इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने लाएंगे।


