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उत्तराखंड में तेजी से बढ़ी आबादी: 15 साल में 28 लाख नए लोग जुड़े, परिवार और मकानों की संख्या में भी बड़ा उछाल

देहरादून, उत्तराखंड | मंगलवार, 26 मई 2026

उत्तराखंड में जनसंख्या वृद्धि को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जनगणना के पहले चरण यानी मकान सूचीकरण और मकान गणना के बाद मिले प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार राज्य की आबादी में पिछले 15 वर्षों में करीब 28 लाख की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसके साथ ही परिवारों और मकानों की संख्या में भी भारी इजाफा दर्ज किया गया है।

जनगणना विभाग द्वारा किए गए पहले चरण के कार्य से यह संकेत मिला है कि राज्य में शहरीकरण, पलायन और जनसंख्या विस्तार की रफ्तार लगातार बढ़ रही है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की कुल आबादी लगभग एक करोड़ 86 हजार दर्ज की गई थी। अब मकान सूचीकरण और प्रारंभिक सर्वेक्षण के बाद जनगणना टीमों की पहुंच करीब एक करोड़ 28 लाख लोगों तक हो चुकी है।

हालांकि ये अभी आधिकारिक अंतिम आंकड़े नहीं हैं, लेकिन शुरुआती डेटा राज्य में तेजी से बढ़ती जनसंख्या का स्पष्ट संकेत दे रहा है।

मकानों और भवनों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2011 में प्रदेशभर में 33 लाख 83 हजार 410 भवनों का सूचीकरण हुआ था, जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर लगभग 45 लाख तक पहुंच गई है।

इस प्रकार राज्य में भवनों की संख्या में करीब 12 लाख का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी शहरी क्षेत्रों के विस्तार, नए आवासीय प्रोजेक्ट्स और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण कार्यों का परिणाम है।

परिवारों की संख्या में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2011 की मकान गणना में प्रदेश में कुल 19 लाख 97 हजार 68 परिवार दर्ज किए गए थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब 28 लाख 30 हजार तक पहुंच गई है।

यानि पिछले डेढ़ दशक में प्रदेश में लगभग आठ लाख नए परिवार जुड़े हैं। इससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि राज्य में परिवारों का आकार छोटा हुआ है और अलग-अलग परिवारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

जनगणना विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी केवल पहला चरण पूरा हुआ है। अंतिम और आधिकारिक आंकड़े आगामी चरणों के बाद जारी किए जाएंगे। इसके बावजूद मौजूदा आंकड़े राज्य में सामाजिक और आर्थिक बदलावों की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जनसंख्या वृद्धि का सीधा असर संसाधनों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और शहरी सुविधाओं पर पड़ता है। ऐसे में सरकार को भविष्य की योजनाएं इसी आधार पर तैयार करनी होंगी।

इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में फरवरी 2027 के दौरान जनगणना होगी, लेकिन हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है।

प्रदेश के करीब 120 बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों में सितंबर माह में विशेष जनगणना अभियान चलाया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि फरवरी के दौरान इन क्षेत्रों के लोग भारी बर्फबारी के कारण अन्य स्थानों पर पलायन कर जाते हैं।

जनगणना विभाग का कहना है कि आधुनिक डिजिटल तकनीक के उपयोग से इस बार आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही डेटा संग्रहण और विश्लेषण की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक तेज और व्यवस्थित होगी।

राज्य सरकार भी इन आंकड़ों को भविष्य की विकास योजनाओं, आधारभूत ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मान रही है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण से सामने आए आंकड़े राज्य में तेजी से बढ़ती आबादी, परिवारों और भवनों की संख्या की तस्वीर पेश कर रहे हैं। पिछले 15 वर्षों में करीब 28 लाख आबादी बढ़ने का अनुमान प्रदेश के बदलते सामाजिक और आर्थिक ढांचे की ओर इशारा करता है। अब अंतिम जनगणना आंकड़ों का इंतजार रहेगा, जो राज्य की वास्तविक जनसंख्या और विकास की दिशा को और स्पष्ट करेंगे।

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