दिनांक : 24 सितंबर 2026
स्थान : देहरादून, उत्तराखंड
भारत निर्वाचन आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपना विरोध तेज कर दिया है। उत्तराखंड कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर 25 सितंबर को देहरादून में सचिवालय घेराव का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि घेराव के जरिए मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कथित अनियमितताओं और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दों को उठाया जाएगा।
हाल में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
कांग्रेस ने उठाए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर इस तरह मतभेद सामने आना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर कांग्रेस अपनी बात जनता के बीच रखने के साथ ही सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने भी उठाएगी।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल लंबे समय से उठाए जा रहे थे और अब निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद इन सवालों को लेकर चर्चा और तेज हुई है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने सामने आई रिपोर्ट पर कहा है कि आयोग के फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और अंतिम निर्णयों में एकमत की स्थिति रही है।
14 आपत्तियों को लेकर बढ़ा विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मौकों पर आयोग के कामकाज से जुड़े फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस के केंद्रीकरण, नए मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म में बदलाव और कुछ मतदाताओं के नाम हटाने या बहाल करने की प्रक्रिया से संबंधित सवाल शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी डेटाबेस तक पहुंच और आईटी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए थे। कुछ मामलों में उनकी ओर से कैबिनेट सचिव को भी पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
गोदियाल बोले- जवाबदेही तय होनी चाहिए
गणेश गोदियाल ने कहा कि अगर किसी निर्णय को लेकर आयोग के भीतर आपत्ति दर्ज की गई थी तो संबंधित अधिकारियों और पदाधिकारियों की भूमिका तथा जवाबदेही भी स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल फाइल पर आपत्ति दर्ज कर देने से जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से विपक्ष सवाल उठाता रहा है। उनके अनुसार, कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर 25 सितंबर के सचिवालय घेराव में अपनी बात प्रमुखता से रखेगी।
राहुल गांधी के पुराने आरोपों का भी किया जिक्र
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से पूर्व में उठाए गए मतदाता सूची और कथित वोट चोरी से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया। गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस पहले से ही चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर सवाल उठाती रही है।
उन्होंने दावा किया कि अब निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आई आपत्तियों के बाद इन मुद्दों पर बहस और गंभीर हो गई है। हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव परिणामों पर इसके प्रभाव को लेकर कांग्रेस के आरोप राजनीतिक दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
सीईसी को लेकर कांग्रेस ने उठाई मांग
गणेश गोदियाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए और निर्वाचन आयोग में बदलाव तथा जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आए।
उन्होंने विभिन्न राज्यों में बनी सरकारों को लेकर भी आरोप लगाए और कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं तो उनकी जांच होनी चाहिए। गोदियाल ने ऐसी सरकारों के इस्तीफे और आवश्यक होने पर संवैधानिक कार्रवाई की मांग भी उठाई।
25 सितंबर को सचिवालय घेराव की तैयारी
कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर 25 सितंबर को देहरादून में सचिवालय घेराव का कार्यक्रम तय किया है। पार्टी कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की गई है। कांग्रेस का कहना है कि घेराव के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की ओर से यह कहा गया है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकता है और अंतिम फैसले आयोग के स्तर पर लिए जाते हैं।
निष्कर्ष
निर्वाचन आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई 14 आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उत्तराखंड में कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर 25 सितंबर को सचिवालय घेराव का कार्यक्रम रखा है। अब इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाती है और सरकार या निर्वाचन आयोग की ओर से उस पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी।


