दिनांक: 22 सितंबर 2026
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
देहरादून के मोहब्बेवाला क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। पिछले करीब नौ महीनों के दौरान इस इलाके में सात बड़े सड़क हादसे सामने आ चुके हैं। इन दुर्घटनाओं में दो लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। लगातार हो रहे हादसों के बाद अब सड़क की बनावट, ढलान और मोड़ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
रविवार के हादसे के बाद फिर सक्रिय हुआ पुलिस-प्रशासन
मोहब्बेवाला में रविवार, 20 सितंबर की सुबह सीमेंट से लदा 16 टायर का ट्रक अनियंत्रित हो गया। ट्रक पहले बाइक से टकराया और इसके बाद डिवाइडर से टकराते हुए करीब 200 मीटर आगे जाकर पलट गया।
दुर्घटना में बाइक सवार जमील की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं बबलू कश्यप और उनकी बेटी रोली गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद पुलिस और अन्य एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य किया।
NHAI को दोबारा भेजा गया नोटिस
लगातार दुर्घटनाओं को देखते हुए दून पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI को पहले भी नोटिस भेजा था। रविवार की दुर्घटना के बाद पुलिस ने एक बार फिर प्राधिकरण को नोटिस भेजकर अब तक हादसों को रोकने के लिए किए गए उपायों की जानकारी मांगी है।
पुलिस ने साथ ही आगे की कार्ययोजना का ब्योरा भी उपलब्ध कराने को कहा है। संबंधित विभाग से तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब मांगा गया है। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि जवाब संतोषजनक नहीं होने की स्थिति में संबंधित विभाग के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
सड़क की ढलान और एलाइमेंट को बताया जा रहा अहम कारण
परिवहन विभाग के अनुसार आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निकास के आसपास सड़क पर तीखी ढलान और मोड़ मौजूद है। इस हिस्से में बाहरी राज्यों से आने वाले भारी और लोडेड वाहनों के अनियंत्रित होने की आशंका बनी रहती है।
आरटीओ देहरादून संदीप सैनी के मुताबिक परिवहन विभाग और जेपी कंपनी की टीम पहले भी इस स्थान का संयुक्त सर्वे कर चुकी है। सर्वे में सड़क की एलाइमेंट से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आने की बात कही गई है।
उनके अनुसार सड़क की एलाइमेंट में सुधार हादसों को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपाय हो सकता है। वहीं तत्काल स्तर पर भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए हर 300 मीटर पर जिग-जैग बैरियर, रंबल स्ट्रिप और रिफ्लेक्टर पेंट व टेप लगाने का सुझाव दिया गया है। इन उपायों से रात के समय सड़क की दृश्यता बढ़ाने और वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
नौ महीने में सामने आए बड़े हादसों पर एक नजर
5 दिसंबर 2025:
मोहब्बेवाला में सीमेंट के कट्टों से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर कई वाहनों से टकरा गया था। इसके बाद ट्रक दुकानों में जा घुसा। हादसे में दो लोग घायल हुए थे और इलाके में लंबा जाम लग गया था। दुर्घटनाग्रस्त ट्रक से डीजल लीक होने के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति भी बनी थी।
18 फरवरी 2026:
मोहब्बेवाला चौक पर एक अनियंत्रित ट्रक कार के ऊपर पलट गया था। हादसे के बाद वाहनों में आग लग गई। हालांकि आग लगने से पहले कार और ट्रक में सवार लोग बाहर निकलने में सफल रहे, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।
9 मार्च 2026:
सहारनपुर की तरफ से देहरादून आ रहा मार्बल से लदा ट्रक मोहब्बेवाला के पास मुख्य हाईवे पर अनियंत्रित होकर पलट गया था। दुर्घटना के बाद देहरादून-सहारनपुर मार्ग पर दोनों तरफ यातायात प्रभावित हुआ और आसपास की सड़कों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया था।
16 अप्रैल 2026:
आशारोड़ी की ओर से देहरादून आ रहा मालवाहक ट्रक मोहब्बेवाला में अनियंत्रित हो गया। ट्रक ने सड़क किनारे खड़े पेंट से भरे एक ट्रक और ऑटो को टक्कर मारी। इसके बाद एमडीडीए के स्वागत बोर्ड को तोड़ते हुए पेड़ से जा टकराया। हादसे में चालक और परिचालक घायल हुए थे, जबकि पांच वाहन क्षतिग्रस्त हुए।
30 मई 2026:
मोहब्बेवाला में चीनी से लदा ट्रक पलट गया था। दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई, लेकिन लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण इस क्षेत्र की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल बने रहे।
20 सितंबर 2026:
रविवार सुबह सीमेंट से भरा 16 टायर का ट्रक अनियंत्रित होकर बाइक से टकराया। इसके बाद ट्रक डिवाइडर से टकराते हुए करीब 200 मीटर आगे जाकर पलट गया। हादसे में बाइक सवार जमील की मौत हो गई, जबकि बबलू कश्यप और उनकी बेटी रोली गंभीर रूप से घायल हो गए।
अब स्थायी समाधान की जरूरत पर जोर
मोहब्बेवाला में लगातार भारी वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है। पुलिस की ओर से NHAI से जवाब मांगा जाना और परिवहन विभाग द्वारा सड़क की तकनीकी खामियों की ओर इशारा किया जाना इस बात को सामने लाता है कि केवल हादसे के बाद राहत कार्य पर्याप्त नहीं हैं।
फिलहाल पुलिस की नजर सड़क सुरक्षा उपायों और NHAI की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दुर्घटना संभावित इस हिस्से में सुझाए गए तात्कालिक सुरक्षा उपाय कितनी जल्दी लागू होते हैं और सड़क की एलाइमेंट से जुड़ी समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष
मोहब्बेवाला में लगातार हो रहे सड़क हादसे अब महज संयोग नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। नौ महीनों में सात बड़े हादसों और दो मौतों के बाद पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से उठाए गए सवालों के बीच अब निगाह NHAI की कार्रवाई पर है। सड़क की तकनीकी खामियों को दूर करने और भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय ही इस दुर्घटना संभावित क्षेत्र में हादसों की पुनरावृत्ति रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


