देहरादून, 25 अगस्त 2026
उत्तराखंड की धामी सरकार ने सैनिकों, अग्निवीरों और शहीद परिवारों से जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देकर बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सेवामुक्त होकर राज्य में लौटने वाले अग्निवीरों के लिए अलग से अग्निवीर रोजगार सेल गठित करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही देश की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित करने का भी फैसला लिया गया है।
सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए बनेगा विशेष रोजगार सेल
उत्तराखंड सरकार का मानना है कि अग्निवीर योजना के तहत सेना में सेवा देने के बाद निर्धारित अवधि पूरी कर वापस लौटने वाले युवाओं के भविष्य को लेकर पहले से तैयारी जरूरी है। इसी उद्देश्य से अग्निवीरों के लिए समर्पित रोजगार सेल बनाया जाएगा।
यह सेल सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को उनकी शैक्षिक योग्यता, सैन्य प्रशिक्षण और कौशल के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करेगा। साथ ही उन्हें राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, विभागों और संस्थानों में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
अग्निवीरों के कौशल का बेहतर इस्तेमाल करने की तैयारी
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के मुताबिक उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य राज्य है और यहां बड़ी संख्या में युवा सेना में सेवाएं दे रहे हैं। अग्निवीरों की निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने के बाद जब वे वापस लौटेंगे, तब उनके रोजगार और भविष्य से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार रखना जरूरी है।
सरकार की योजना केवल अग्निवीरों को नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं रहेगी। उनके सैन्य अनुभव, प्रशिक्षण और क्षमताओं का राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किस तरह उपयोग किया जा सकता है, इस पर भी रणनीति तैयार की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किए जाने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री ने फैसले को बताया युवाओं के प्रति जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित रोजगार सेल गठित करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का कहना है कि सेना में रहकर देश की सेवा करने वाले युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रोजगार सेल के माध्यम से अग्निवीरों को उनकी योग्यता के अनुसार विभिन्न संभावनाओं की जानकारी और अवसर उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
शहीद सैनिकों की प्रतिमाएं पैतृक गांवों में स्थापित होंगी
कैबिनेट ने सैनिकों और शहीदों के सम्मान से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि उत्तराखंड के हजारों परिवारों की सैन्य पृष्ठभूमि रही है और बड़ी संख्या में जवान देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं। लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि शहीदों को उनके पैतृक गांव में स्थायी रूप से सम्मान दिया जाए। कैबिनेट के फैसले के बाद इस दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
नई पीढ़ी को मिलेगी शहीदों के बलिदान से प्रेरणा
सरकार का मानना है कि शहीद सैनिकों की प्रतिमाएं उनके गांवों में स्थापित होने से उनके परिवारों और ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान होगा। इसके साथ ही गांवों में आने वाली नई पीढ़ी को भी उन वीर सैनिकों के बलिदान और राष्ट्रसेवा के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
शहीदों की प्रतिमाएं केवल सम्मान का प्रतीक नहीं होंगी, बल्कि युवाओं के लिए देशसेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा का माध्यम भी बनेंगी। सरकार इसे सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता की अभिव्यक्ति के तौर पर देख रही है।
सैनिक कल्याण को लेकर सरकार का फोकस
उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और सेना में राज्य के युवाओं की बड़ी भागीदारी को देखते हुए कैबिनेट के दोनों फैसले महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एक ओर सरकार ने अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने के बाद उनके रोजगार और पुनर्वास के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने की पहल की है, वहीं दूसरी ओर शहीद सैनिकों को उनके पैतृक गांवों में सम्मान देने का निर्णय लिया गया है।
इन फैसलों के जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सैनिकों की सेवा केवल उनकी सैन्य अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा के बाद उनके भविष्य और शहीदों के सम्मान की जिम्मेदारी भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड कैबिनेट के इन दोनों फैसलों को राज्य की सैनिक पृष्ठभूमि के अनुरूप महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अग्निवीर रोजगार सेल के जरिए सेना से लौटने वाले युवाओं को रोजगार, सरकारी योजनाओं और उनके कौशल के अनुरूप अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। वहीं शहीदों की प्रतिमाएं पैतृक गांवों में स्थापित किए जाने से उनके बलिदान को स्थानीय स्तर पर स्थायी सम्मान मिलेगा। सरकार के मुताबिक दोनों पहल सैनिकों, अग्निवीरों और उनके परिवारों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हैं।


