देहरादून, 25 अगस्त 2026
उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 40 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 28 मामले देहरादून जिले से रिपोर्ट हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संक्रमित मरीजों में से 27 लोग उपचार के बाद स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि अन्य मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। अब तक इस संक्रमण से पांच लोगों की मौत की सूचना है।
पांच मृतकों में को-मॉर्बिडिटी की स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक स्वाइन फ्लू से जिन पांच मरीजों की मौत हुई, वे पहले से ही अन्य गंभीर बीमारियों यानी को-मॉर्बिडिटी से जूझ रहे थे। ऐसे मरीजों में संक्रमण का असर अधिक गंभीर होने की आशंका रहती है। विभाग ने बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
अस्पतालों को दिए गए जरूरी दिशा-निर्देश
स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के अस्पतालों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में आइसोलेशन बेड चिह्नित करने, फ्लू से संबंधित मरीजों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं रखने और पर्याप्त चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराने को कहा गया है।
अस्पतालों में दवाइयों के साथ मास्क, सैनिटाइजर और पीपीई किट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार जरूरी चिकित्सा सामग्री की खरीद भी की जा रही है, ताकि संक्रमण के मामलों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
अधिकांश मामले माइल्ड, घबराने की जरूरत नहीं
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वर्तमान स्थिति को लेकर लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार सामने आ रहे अधिकांश मामले माइल्ड यानी सामान्य प्रकृति के हैं। हालांकि, जोखिम वाले समूहों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न बरतने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।
इन लोगों को अधिक सावधानी बरतने की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचने और आवश्यकता होने पर मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
सर्दी, जुकाम, खांसी या बुखार जैसे लक्षण होने पर घर पर रहने और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने को कहा गया है। खांसते या छींकते समय रुमाल अथवा टिश्यू का इस्तेमाल करने, खुले में न थूकने और नियमित रूप से हाथों को साफ रखने की भी सलाह दी गई है।
कोरोना काल की सावधानियां भी रहेंगी कारगर
देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने लोगों से अपील की है कि वे स्वाइन फ्लू को लेकर सावधानी बरतें, लेकिन अनावश्यक डर या पैनिक की स्थिति न बनाएं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान अपनाई गई कई सामान्य सावधानियां स्वाइन फ्लू से बचाव में भी प्रभावी हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच की सुविधाएं बढ़ने के कारण अब सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीजों की भी जांच की जा रही है। इससे संक्रमण के मामलों की पहचान पहले की तुलना में जल्दी हो रही है और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
विभाग ने लोगों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू के लक्षणों को हल्के में न लें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें। साथ ही अफवाहों पर ध्यान न देने और बिना पुष्टि के किसी भी तरह की जानकारी साझा करने से बचने को कहा गया है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के 40 मामले सामने आने और पांच मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में तैयारियां बढ़ा दी हैं। हालांकि अधिकांश मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं और विभाग के मुताबिक मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है। ऐसे में आम लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे घबराने के बजाय सावधानी बरतें, जबकि बुजुर्गों और को-मॉर्बिडिटी वाले लोगों को संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर विशेष सतर्कता अपनानी चाहिए।


