देहरादून, उत्तराखंड | मंगलवार, 26 मई 2026
उत्तराखंड में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के सरकारी दावों के बीच देहरादून में हुए औचक निरीक्षण ने कई निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निरीक्षण के दौरान मरीजों से अवैध शुल्क वसूली, अनावश्यक आईसीयू भर्ती और खराब चिकित्सा व्यवस्थाओं जैसी कई अनियमितताएं उजागर हुईं, जिसके बाद संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
निदेशक क्लेम डॉ. सरोज नैथानी के नेतृत्व में गठित विशेष निरीक्षण टीम ने मंगलवार को शहर के कई निजी अस्पतालों और डायलिसिस केंद्रों का अचानक निरीक्षण किया। टीम में डॉ. अपूर्वा, पंकज, पुनीत और नवीन चमोली भी शामिल रहे।
जांच के दौरान अरिहंत अस्पताल, हंस डायलिसिस सेंटर, बालूनी अस्पताल, राहि नेत्रालय और ओजस्वी अस्पताल की व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई। निरीक्षण में कई जगह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आयुष्मान योजना के नियमों के पालन में गंभीर खामियां सामने आईं।
सबसे चिंताजनक स्थिति अरिहंत अस्पताल में देखने को मिली। यहां छह बेड वाला डायलिसिस सेंटर बेहद खराब हालात में एक छोटे कमरे में संचालित होता पाया गया। निरीक्षण टीम के अनुसार वहां किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की नियमित निगरानी नहीं थी और नर्सिंग स्टाफ को डायलिसिस प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी तक नहीं थी।
स्वास्थ्य विभाग ने इसे मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आगे कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
हंस डायलिसिस सेंटर में भी कई कमियां उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि केंद्र में आयुष्मान योजना के तहत उपलब्ध सुविधाओं का अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा था। इसके अलावा मरीजों और उनके परिजनों को योजना की जानकारी देने के लिए आवश्यक जागरूकता गतिविधियां भी लगभग न के बराबर थीं।
स्वास्थ्य विभाग ने इसे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में लापरवाही माना है और सुधार के निर्देश जारी किए हैं।
ओजस्वी अस्पताल में निरीक्षण के समय केवल चार मरीज भर्ती मिले, जिनमें से दो मरीज उधम सिंह नगर से आयुष्मान योजना के तहत लाए गए थे। जांच में दो मामलों में मरीजों को बिना आवश्यकता आईसीयू में भर्ती किए जाने की बात सामने आई।
अधिकारियों को आशंका है कि अस्पताल द्वारा अधिक भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से अनावश्यक आईसीयू भर्ती की गई हो सकती है। मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
बालूनी अस्पताल में सबसे गंभीर मामला सामने आया, जहां आयुष्मान योजना के लाभार्थी से उपचार के नाम पर 17,250 रुपये वसूले जाने की शिकायत सही पाई गई। जबकि योजना के नियमों के अनुसार पात्र मरीजों का उपचार पूरी तरह निशुल्क होना चाहिए।
इस खुलासे के बाद विभाग ने अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है और मामले में विभागीय जांच के संकेत दिए हैं।
राहि नेत्रालय में भी स्वास्थ्य सुविधाओं और दस्तावेजों की जांच की गई। अधिकारियों ने बताया कि यहां की निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि आयुष्मान भारत योजना के नाम पर किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या मरीजों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे औचक निरीक्षण और तेज किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि कोई अस्पताल इसका दुरुपयोग करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
देहरादून में हुए इस औचक निरीक्षण ने आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन की जमीनी सच्चाई सामने ला दी है। कई अस्पतालों में पाई गई अनियमितताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योजना के नाम पर मरीजों के अधिकारों से खिलवाड़ किया जा रहा था। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग नोटिस जारी करने के बाद दोषी अस्पतालों पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है और क्या इससे स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार हो पाता है।


