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क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर 12 करोड़ की कथित ठगी, 160 निवेशकों को रिटर्न का झांसा देकर फंसाया

देहरादून | 19 अगस्त 2026

क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर निवेशकों से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। देहरादून के रायपुर थाना क्षेत्र में करीब 12 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में पुलिस ने अदालत के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत के मुताबिक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और वेबसाइटों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया गया और हर महीने 5 से 6 प्रतिशत तक रिटर्न देने का भरोसा दिलाया गया।

140 से 160 लोगों से निवेश कराने का आरोप

पुलिस के अनुसार नथुवावाला निवासी अनूप सिंह की शिकायत पर मुजफ्फरनगर के घासीपुरा निवासी लविश चौधरी उर्फ नवाब अली के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से निवेश कराया।

निवेश जुटाने के लिए सोशल मीडिया, वेबसाइट और विभिन्न ऑनलाइन अभियानों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। निवेशकों को बताया गया कि उनका पैसा ऑटोमेटेड क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में लगाया जाएगा और इसके बदले उन्हें हर महीने लगभग 5 से 6 प्रतिशत तक का रिटर्न मिलेगा।

रिटर्न के लालच में निवेश, फिर बंद हुई निकासी

शिकायतकर्ता समेत कई लोगों ने अधिक मुनाफे की उम्मीद में बताए गए प्लेटफॉर्म पर अपनी रकम निवेश की। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों से पैसा जमा कराने के बाद अक्टूबर से निवेश की निकासी बंद कर दी गई।

इसके बाद निवेशकों को अपनी रकम वापस मिलने में परेशानी होने लगी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान आरोपी कथित तौर पर गायब हो गया। इससे निवेशकों की बड़ी रकम फंस गई और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

मामले में कुल कथित धोखाधड़ी की रकम करीब 12 करोड़ रुपये बताई गई है। देहरादून क्षेत्र में इस नेटवर्क से लगभग 140 से 160 लोगों के प्रभावित होने का दावा किया गया है।

पहले थाने और एसएसपी से की गई शिकायत

शिकायतकर्ता के मुताबिक, मामले को लेकर रायपुर थाने में अक्टूबर 2025, मार्च 2026 और मई 2026 में शिकायतें दी गई थीं। इसके अलावा एसएसपी देहरादून को भी लिखित शिकायत भेजे जाने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद अदालत का रुख किया गया। अदालत के आदेश के बाद अब रायपुर थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

संबंधित धाराओं में मुकदमा, डिजिटल लेनदेन की होगी जांच

पुलिस ने अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। प्रकरण की जांच उपनिरीक्षक साहिल वशिष्ठ को सौंपी गई है।

जांच के दौरान पुलिस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और निवेशकों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि कथित धोखाधड़ी में आरोपी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति या संस्था शामिल थी या नहीं।

रायपुर थाना प्रभारी संजीत कुमार के अनुसार अदालत के आदेश के बाद आरोपी लविश चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन की जांच के साथ मामले से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका भी खंगालेगी।

अलग मामला: APK फाइल डाउनलोड करते ही 99 हजार रुपये खाते से निकले

देहरादून के मामले से अलग हरिद्वार में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। भीमगौड़ा निवासी एक व्यक्ति ने मोबाइल फोन में एक APK फाइल डाउनलोड की, जिसके बाद उसके बैंक खाते से 99 हजार रुपये निकल गए।

बताया गया कि फाइल डाउनलोड करने के बाद मोबाइल में अपडेट का विकल्प दिखाई दिया। पीड़ित ने जैसे ही आगे की प्रक्रिया पूरी की, उसके मोबाइल से जुड़ी डिजिटल भुगतान सुविधा कथित तौर पर हैक हो गई और खाते से 99 हजार रुपये की निकासी हो गई।

खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने बैंक को सूचना दी और पुलिस तथा साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई।

साइबर सेल की तत्परता से पूरी रकम वापस

शिकायत मिलने के बाद हरिद्वार साइबर सेल ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। टीम ने बैंक से संपर्क कर ठगी गई रकम के लेनदेन को ट्रेस करने की प्रक्रिया शुरू की। समय रहते कार्रवाई होने के कारण 99 हजार रुपये की राशि को होल्ड कराया जा सका।

इसके बाद साइबर सेल की लगातार कार्रवाई के चलते पूरी 99 हजार रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस और साइबर सेल का आभार जताया।

अनजान APK और लिंक से रहें सावधान

एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान स्रोत से मोबाइल में एप्लीकेशन या फाइल डाउनलोड न करें। खासकर APK फाइल, संदिग्ध लिंक और अनजान अपडेट विकल्प पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।

उन्होंने कहा कि बैंक खाते से कोई संदिग्ध लेनदेन होने की जानकारी मिलते ही बिना देरी किए संबंधित बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देनी चाहिए। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को होल्ड कराने और वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।

निष्कर्ष

देहरादून में क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करीब 12 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला ऑनलाइन निवेश के बढ़ते जोखिम को सामने लाता है। पुलिस अब आरोपी के डिजिटल नेटवर्क, बैंकिंग लेनदेन और निवेशकों से जुटाई गई रकम की जांच कर रही है। वहीं हरिद्वार में APK फाइल के जरिए हुई साइबर ठगी में समय पर शिकायत मिलने से 99 हजार रुपये वापस कराए जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल शिकायत करना बेहद महत्वपूर्ण है।

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