चंपावत/देहरादून | 11 अगस्त 2026
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा सीट चंपावत में आयोजित सावन उत्सव कार्यक्रम के दौरान उनकी पत्नी गीता धामी ने राज्य सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए लैंड जिहाद, लव जिहाद, धर्मांतरण और अवैध कब्जों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गीता धामी ने महिलाओं को संबोधित किया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से किए जा रहे विभिन्न कार्यों का बखान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को सुरक्षित रखने के लिए कानून और नियमों का प्रभावी पालन जरूरी है।
UCC को लेकर सरकार के काम का किया उल्लेख
कार्यक्रम में गीता धामी ने समान नागरिक संहिता यानी UCC का जिक्र करते हुए कहा कि इसके माध्यम से राज्य सरकार ने बेटियों और महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में काम किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और बेहतर उत्तराखंड तैयार करना है।
लैंड जिहाद के मुद्दे पर गीता धामी का दावा
गीता धामी ने अपने संबोधन में सरकारी जमीनों पर कथित अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड में 10 हजार एकड़ से अधिक भूमि पर लोगों ने कब्जा किया था और इसे उन्होंने ‘लैंड जिहाद’ की संज्ञा दी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण और कब्जे को लेकर सरकार की ओर से कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि राज्य में बाहरी लोगों की पहचान और दस्तावेजों की जांच के लिए सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।
सत्यापन अभियान को लेकर भी रखी बात
महिलाओं को संबोधित करते हुए गीता धामी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। उनके अनुसार इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की जानकारी सामने आ रही है जिनकी पहचान और दस्तावेजों को लेकर जांच की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर दूसरे नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति की नागरिकता या पहचान के संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासनिक और कानूनी जांच के बाद ही तय होती है।
लव जिहाद और धर्मांतरण का भी उठाया मुद्दा
गीता धामी ने अपने संबोधन में लव जिहाद और धर्मांतरण के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पहचान छिपाकर लोगों को भ्रमित करने या बहलाने-फुसलाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ कानून लागू किया है और इस तरह की गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए कानूनी व्यवस्था मौजूद है।
मदरसों और शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार की नीति गिनाई
गीता धामी ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने मदरसों की व्यवस्था को लेकर भी कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से अवैध रूप से संचालित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री धामी के कार्यों को बताया भविष्य से जोड़कर
गीता धामी ने कहा कि आम लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त रहते हैं और ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रदेश के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास उत्तराखंड की आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और बेहतर वातावरण तैयार करना है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ रही राजनीतिक सक्रियता
उत्तराखंड में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दल अपने संगठन और जनसंपर्क अभियानों को मजबूत करने में जुटे हैं। सरकार की उपलब्धियों, कानून व्यवस्था, UCC, धर्मांतरण, भूमि कब्जे और सत्यापन जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
चंपावत में आयोजित कार्यक्रम में गीता धामी का संबोधन भी इसी व्यापक राजनीतिक माहौल के बीच सामने आया है। उनके बयान के बाद इन मुद्दों पर सियासी प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।
निष्कर्ष
चंपावत में सावन उत्सव के दौरान गीता धामी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को महिलाओं के बीच रखा। उन्होंने UCC, सत्यापन अभियान, सरकारी भूमि पर कथित कब्जों, धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे मुद्दों को सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इन मुद्दों को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है।


