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देहरादून में लोक संवर्धन पर्व का भव्य शुभारंभ, देशभर के शिल्पकारों और लोक कलाकारों का संगम, 150 से अधिक स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र

देहरादून, उत्तराखंड | 11 जुलाई 2026

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शनिवार को पांच दिवसीय लोक संवर्धन पर्व का भव्य शुभारंभ हुआ। 11 से 15 जुलाई तक आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण से हुई, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

यह आयोजन देशभर की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। महोत्सव में विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार, हस्तशिल्पी, लोक कलाकार, उद्यमी और पारंपरिक व्यंजनों के विशेषज्ञ अपनी कला और उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

150 से अधिक स्टॉल पर दिखेगी भारत की सांस्कृतिक विरासत

लोक संवर्धन पर्व में 150 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों की पारंपरिक हस्तकलाएं, हथकरघा उत्पाद, लोक कला, जैविक उत्पाद, स्थानीय खाद्य सामग्री और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अनेक आकर्षण देखने को मिल रहे हैं।

महोत्सव का उद्देश्य न केवल देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, बल्कि कारीगरों और शिल्पकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और नए बाजार उपलब्ध कराने का अवसर देना भी है।

उत्तराखंड बना केंद्रीय मंत्रालय के साथ साझेदारी करने वाला पहला राज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ मिलकर लोक संवर्धन पर्व का आयोजन करने वाला देश का पहला राज्य बनने का गौरव उसे प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक समन्वय का परिणाम नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि उत्तराखंड राष्ट्रीय स्तर की जनकल्याणकारी और विकासोन्मुखी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को सफल बनाने में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना भी की।

संस्कृति और परंपरा भारत की सबसे बड़ी शक्ति: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारत की विविध भाषाएं, लोक परंपराएं, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को अपनी परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

उन्होंने कहा कि लोक संवर्धन पर्व शिल्पकारों, हस्तशिल्पियों और लोक कलाकारों को नए बाजार, नई पहचान और आर्थिक अवसर प्रदान करेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के साथ स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

अल्पसंख्यक समाज के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अल्पसंख्यक समाज के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। इनमें छात्रवृत्ति, मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना, कौशल विकास कार्यक्रम, स्वरोजगार योजनाएं, शिक्षा ऋण, मुख्यमंत्री हुनर योजना तथा अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों के विकास संबंधी विभिन्न पहल शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि मदरसों में आधुनिक तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि युवाओं को आधुनिक शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

स्थानीय उत्पाद खरीदने की मुख्यमंत्री ने की अपील

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और देवभूमि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से अपील की कि वे लोक संवर्धन पर्व में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचें और स्थानीय शिल्पकारों व कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों की खरीद कर उन्हें प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

किरेन रिजिजू बोले— यह केवल प्रदर्शनी नहीं, भारत की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने संबोधन में कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कौशल और कारीगरों के सम्मान का राष्ट्रीय उत्सव है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पारंपरिक शिल्प, हस्तकला, लोक संस्कृति और अल्पसंख्यक समुदायों के कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

पीएम विकास योजना से मिल रहे नए अवसर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना के अंतर्गत आयोजित यह महोत्सव शिल्पकारों को विपणन, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने का प्रभावी मंच बन रहा है।

उन्होंने उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इस आयोजन में साझेदारी करने वाला पहला राज्य बनकर उत्तराखंड ने सांस्कृतिक संरक्षण और विकास के प्रति अपनी गंभीर प्रतिबद्धता का परिचय दिया है।

पांच दिनों तक चलेगा सांस्कृतिक और हस्तशिल्प महोत्सव

11 से 15 जुलाई तक चलने वाले इस महोत्सव में लोक संगीत, लोक नृत्य, पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शनी, स्थानीय व्यंजनों का स्वाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और उद्यमिता से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बड़ी संख्या में पर्यटकों, कला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

निष्कर्ष

देहरादून में शुरू हुआ लोक संवर्धन पर्व केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि देश की समृद्ध लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और स्थानीय उद्यमों को नई पहचान देने का राष्ट्रीय मंच बनकर उभरा है। उत्तराखंड के पहले साझेदार राज्य बनने के साथ यह आयोजन सांस्कृतिक संरक्षण, आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय कारीगरों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह महोत्सव प्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने की उम्मीद जगाता है।

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